निशांत नंदन के फेसबुक वॉल से साभार

फाइल फोटो- चंद्रशेखर

हैलो…

क्या हाल है ठीक ही है सर चल रहा है सब…क्या हुआ बात हुई कुछ आगे…नहीं सर अभी तो देख रहा हूं.. वैसे प्रेम सर से बात हुई थी तो उन्होंने कहा है कि आपकी नौकरी के लिए कोशिश कर रहा हूं। थोड़ा हालात (#COVID_19) संभल जाए तो जरुर बात करूंगा। हां-हां चंद्रशेखर जी लगे रहना है जरुर होगा कहीं ना कहीं। वैसे मैं भी आपको एक-दो जगह वैकेंसी का डिटेल भेज देता हूं। देख लीजियेगा। कोशिश करते रहने से कही ना कही हो ही जाएगा…चिंता मत करीए। हां, निशांत सर आप लोग हैं तो हमको विश्वास है कि कहीं ना कही मेरा जरुर हो जाएगा। बहुत मुश्किल हो गया है। आप तो जान ही रहे हैं सब…नहीं चंद्रशेखर जी सब भगवान हैं वो जरुर आपके लिए कुछ ना कुछ करेंगे।’ कुछ दिनों पहले आपसे कुछ इसी अंदाज में बात हुई थी मित्र…अब रुला दिया यार तूने…

सुनिए चंद्रशेखर जी, आपको फोन मिला रहा हूं अब दोबारा पर जवाब नहीं मिल रहा…। फोन उठाईए दोस्त, आपसे बात करनी है…एक जगह और वैकेंसी आई है…यह बात बतानी है। फोन उठा लो भाई.. किसी बात पर नाराजगी है तो एक बार बात कर के दूर कर लो या कुछ बताना चाहते हो तो बता दो…पर बात तो कर लो। यकीन मानो भगवान भी आकर कहें कि अब तुम मेरा फोन कभी नहीं उठाओगे तो मैं उनसे भी आंख मिला कर कह दूंगा कि मुझे आप पर यकीन नहीं मुझे चंद्रशेखर पर यकीन है। विश्वास मत तोड़ो,,,बात कर लो मुझसे।

फाइल फोटो-चंद्रशेखर

यह पहली बार है जब कुछ लिखते हुए मेरे हाथ कांप रहे हैं, रोशनी में आंखों के आगे अंधेरा है, दिल जोर-जोर से धड़क रहा है और शरीर शून्य में है। चंद्रशेखर, तुम्हारी यादें और बातें झकझोरने वाली हैं…ना जानें क्यों तुम ही हो आंखों के सामने। कानों में टिक-टिक करती घड़ी की सूईयां मुझे पीछे ले जा रही हैं और तुम्हारी हर बात मुझे याद दिला रही हैं। सच कह रहा हूं तुम नहीं हो अब हमारे बीच यह सोच कर इस वक्त रोंगटे खड़े हो गए हैं और सिर से लेकर पांव तक शरीर सिहर उठा है।

रात 9 बजे पता चला कि चंद्रशेखर जी हमें अधूरा छोड़ कर चले गए। तब से लेकर अब तक फोन की घंटी और मैसेज थमने का नाम नहीं ले रहे। कोई बात करते-करते रोने लगता है, कोई यह कह भी नहीं पाता कि उसने फोन क्यों किया बस खामोशी में ही हम एक-दूसरे से अपनी बातें कह रहे हैं। रात 11 बजे दुखी मन से सुनील पांडे सर ने फोन कर कहा कि निशांत क्या कर सकते हैं चंद्रशेखर जी के लिए… थोड़ी ही देर बात रात 11:45 मिनट पर व्याकुल विजय कुमार झा जी ने फोन कर कहा कि यह तो गलत बात है वो मुझे कर्जदार बना कर चले गए और हां एक बात यह भी उन्होंने कहा कि प्रेम सर को फोन किये थे वो तो रो रहे हैं बात ही नहीं कर पा रहे। मुझे नहीं पता कि तुम किससे नाराज थे पर सुन लो अब तक जिसने भी मुझे फोन किया उसने मुझसे यहीं कहा कि वो बहुत सज्जन थे, निश्चल थे, प्यारे इंसान थे, सीधे आदमी थे…। इस नाजुक घड़ी में चंद्रशेखर जी आपका जाना हम सभी के लिए बेहद दुखी करने वाला है।

फाइल फोटो

‘अरे चंद्रशेखर जी ये वाला पैकेज अश्विनी सर ने दिया है अर्जेन्ट है कटवा दीजिए इसको। चंद्रशेखर जी ये टिकटॉक है बहुत जरुरी है प्रभाष सर का है उनको तुरंत देना है। बुलेटिन पर आज कैलाश सोलंकिया जी है उनको जरा विजुअल चंद्रशेखर जी जल्दी-जल्दी दे दीजिए नहीं तो वो चिल्लाने लगते हैं। विनोद गुप्ता सर बॉस का बुलेटिन देख रहे हैं जल्दी से उनका विजुअल दे दीजिए चंद्रशेखऱ जी ब्रिजमोहन सर स्पेशल आज हमसे ही बनवा रहे हैं देख लीजियेगा चंद्रशेखर जी । आज ओम नाथ जी नहीं है आप पर ही दारोमदार है चंद्रशेखर जी। ऋत्विक बाग्ची सेकेंड शिफ्ट में है आप देख लीजिएगा चंद्रशेखर जी आज सारा प्रोडक्शन। रविकांत ओझा सर मॉर्निंग में शिफ्ट देख रहे हैं उनको सबसे पहले बाइट सारा दे दीजियेगा। आज शाम में रवि रंजन सर हैं, अपने आदमी हैं टेंशन मत लीजिए आराम-आराम से सारा कटवा दीजिए। अरे जितेंद्र कुमार चिल्ला क्यों रहे हो चंद्रशेखर जी कटवा रहे हैं पैकेज। रघु या चंद्रशेखर में जो कोई एक होगा शिफ्ट में काम हो जाएगा आपका सारा विजुअल समय से कट जाएगा। चंद्र प्रकाश पांडे ने पैकेज बढ़िया लिखा है इसको बढ़िया से कटवाइयेगा चंद्रशेखर जी। आलोक साहिल के पैकेज में विजुअल लाइब्रेरी से लेना होगा देख लीजिएगा चंद्रशेखर जी। विकास सर नाराज नहीं होते हैं उनको सिर्फ विजुअल देते जाइए। प्रयांक के साथ मिलकर आज चंद्रशेखर जी आप लोग संभाल लीजिए। आरिज़ मतबूल का टिकटॉक है जल्दी से दे दीजिए। चंद्रशेखऱ जी रितुराज आज रंग में है थोड़ा समझ लीजियेगा।’ #FocusNews मे आप और हम कुछ इसी अंदाज मे बात करते थे। याद है ना।

अब कितने नाम लूं हर नाम से आप जुड़े थे चंद्रशेखर जी। आप को याद करने, लिखने के लिए ना तो शब्दों की कमी है और ना ही उन कहानियों की जिसमें आप ही आप हैं। आज सबको बता देता हूं कि ना तो मैं आपका सीनियर था और ना आप मेरे जूनियर हम दोनों एक दूसरे को ‘जी, आप और सर’ इसलिए कहते थे ताकि एक-दूसरे को सम्मान देकर इस आपसी प्यार को और भी गहरा कर सकें।पर दोस्त तुम सबकुछ खाली सा छोड़ कर चले गए। क्यों नहीं ले गए अपनी यादों को अपनी कहानियों को भी अपने साथ? क्यों आज अकेला कर दिया…मुझमें हिम्मत नहीं कि तुम्हारे जैसा बन जाऊं। तुम नौकरी को लेकर परेशान थे मैं जानता हूं पर जिंदगी से तुम परेशान रहने वाले कभी नहीं थे। मुझे याद है कि कुछ दिनों पहले तुमसे मुलाकात हुई थी औऱ तुमने कहा था कि हां सर दिल्ली में रहने, किराया देना, परिवार रखना बहुत मुश्किल है। नौकरी की शख्त जरुरत है। कम पैसे भी मिलेंगे तो भी नौकरी करूंगा। तुमने बताया था कि जहां तुम पहले काम करते थे उस संस्थान ने तुम्हें नौकरी से हटाते वक्त तुम्हारे पैसे भी रख लिये थे। काफी मिन्नतें और कड़ी मेहनत के बाद तुम्हें संस्थान ने कुछ पैसे दिये थे और अब भी कुछ पैसे देने बाकी थे।’

चंद्रशेखर जी अफसोस इस बात का है कि मैं आपके लिए कुछ कर नहीं पाया और गुस्सा इस बात का है कि ऊपर वाले तुम्हें इतनी जल्दी क्यों बुलाया? याद है मुझे समय निकाल कर आप कुछ महीने पहले मेरे ऑफिस आए थे और हम दोनों ने काफी देर तक बातचीत की थी। उसके बाद भी कई बार हम दोनों की मुलाकात हुई। कितने बातें हुई..कितना कुछ सोचा हमने…सबकुछ मेरे कमजोर कंधे पर रख कर चले गए चंद्रशेखर जी…रुला दिया यार तूने..#RIP Chandra Shekhar

निशांत नंदन/नालंदा यनिवर्सिटी के पूर्व छात्र । पत्रकारिता के बाद दिल्ली को कर्मभूमि बना लिया ।कई मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे ।संप्रति जनसत्ता में बतौरा सब एडिटर कार्यरत ।