अमजद साहब! 34 साल बाद कुछ यूं मिले… कैसा लगा आपको?

सच्चिदानंद जोशी बात आज से चौंतीस (34) बरस पहले की होगी। उन दिनों एमए के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर

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समय ‘वाचाल’ है और कवि ‘मौन’!

पशुपति शर्मा ‘समय वाचाल है’ इसी शीर्षक से आजतक में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार साथी देवांशुजी का काव्य संग्रह हाथ में

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मनुष्यता का संदेश देती सच्चिदानंद जोशी की कहानियां

पशुपति शर्मा साहित्य अकादमी का सभागार शनिवार, 27 मई की शाम एक और पुस्तक विमोचन का गवाह बना। प्रभात प्रकाशन

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सच्चिदानंद जोशी की पुस्तक का लोकार्पण 27 मई को

बदलाव प्रतिनिधि, दिल्ली सच्चिदानंद जोशी, कभी आप उनमें एक शिक्षाविद ढूंढ सकते हैं। कभी उनमें आप एक संस्कृतकर्मी तलाश सकते

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दिल्ली में फोटोग्राफी के किंग से एक मुलाक़ात

सत्येंद्र कुमार यादव कुछ पत्रकार साथियों के साथ 25 अक्टूबर 2016 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र जाना हुआ । IGNCA

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