Tag archives for होली

परब-त्योहार

अब न रहा वो फगुआ, अब न रहे वो हुरियारे

प्रशांत पांडेय ज़िंदगी की आपा धापी में प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं। मनुष्य समय के चक्र में फँसकर उसी के इशारे पर चलने को मजबूर हो जाता है। पिछले दो साल…
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बिहार/झारखंड

बदलाव के दूसरे होली मिलन में बच्चों ने बिखेरे रंग

बदलाव पाठशाला में होली मिलन समारोह ब्रह्मानंद ठाकुर बदलाव का होली मिलन समारोह इस बार बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में आयोजित हुआ । मुजफ्फरपुर के पीयर गांव में बदलाव पाठशाला…
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माटी की खुशबू

मन फागुन-फागुन हो गया

       संजय पंकज  मंजरियों की गंध लगी तो  मन फागुन फागुन हो गया! प्रेमिल सुधियाँ अंग लगी तो  मन फागुन फागुन हो गया! भूले बिसरे आज अचानक  जाने …
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परब-त्योहार

अंग-अंग में बोल गया फागुन

संजय पंकज बोल गया फागुन अंग अंग में जाने कैसा रस घोल गया फागुन ! रंग नयन में गंध सांस में प्राण बंध अनुबंध हास में तैर गगन में उतर…
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नाचे तन-मन, नाचे जीवन

हिलता-खिलता-मिलता-जुलता आया होली का त्यौहार। नाचे तन-मन, नाचे जीवन नाचे आंगन, नाचे उपवन रंग-बिरंगी ओढ़ चदरिया धरती लाई नई बहार। टेसू महके, चहके पंछी धुन में अपनी हंस व हंसी…
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नाचे, गाएं, खेलें होली… जोगीरा सा रा रा

गांव घर की होली। फगुआ गान। ‎कालीमंदिर, ‎धमदाहा‬ में गांव की टोली का जोगीरा सा रा रा बासु मित्र पिछले एक दशक से मेरे गांव में भी होली की चमक…
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