ये मूर्खता के भूमंडलीकरण का दौर है !

राकेश कायस्थ/ पिछले पांच साल में इस देश में प्रति मिनट जितने शौचालय बने हैं, उन्हें अगर जोड़ा जाये तो

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सोशल मीडिया के ‘ब्लैकहोल’ में गुम होता युवावर्ग

डा. सुधांशु कुमार आज जिस प्रकार सोशल मीडिया पर खासकर किशोर और युवावर्ग अपनी आंखें गड़ाए रहते हैं , यह

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नये साल पर अजीजों की आवाज़ सुनने को जी चाहता है

अखिलेश्वर पांडेय नये साल पर मुझे कई बधाई संदेश मिले, मैंने भी कई लोगों को ‘हैप्पी न्यू इयर’ का मैसेज

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पुराने तैमूर पर नया ‘उन्माद’ कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है!

कुमार सर्वेश मुझे आज सोशल मीडिया तैमूर लंग से ज्यादा खतरनाक लगता है। तैमूर तो अपने पेशे से खूंखार था।

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मधेपुरा में सोशल मीडिया पर बड़ी बहस

रूपेश कुमार सोशल मीडिया जनक्रांति का सशक्त माध्यम है। जिस गति से समाज बदल रहा है उसमें सोशल मीडिया की भूमिका

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महीनों का काम घंटों में… कमाल है डीएम साहब!

अरुण यादव अगर आपके जिले के आलाधिकारी आपकी समस्या का निपटारा घर बैठे कर दें, तो कैसा लगेगा ? जरा

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रवीश, सोशल मीडिया के ‘बायकॉट की पॉलिटिक्स’ क्या है?

धीरेंद्र पुंडीर “आप मेरी नहीं अपनी चिंता करे क्योंकि अब बारी आपकी है। आप सरकारों का हिसाब कीजिए कि आपके

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