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मेरा गांव, मेरा देश

सुकराती पर्व की सोन्ही यादें और बैलों की घंटी का संगीत 

ब्रह्मानंद ठाकुर इस दुनिया मे चिरंतन ,शाश्वत और अपरिवर्तनशील कुछ भी नहीं है। वस्तुजगत का कण - कण परिवर्तनशील है। मूल्य, मान्यताएं, आस्था, धर्म, विश्वास, नीति-नैतिकता और परम्परा भी इस…
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माटी की खुशबू

पशुपालकों के पर्व सुकराती के बारे में सुना है?

ब्रह्मानंद ठाकुर अतीत सुंदर था, खुशहाल था, गौरवपूर्ण था, इसलिए वह दुहराने की चीज नहीं हो सकती लेकिन प्रेरणा तो उससे अवश्य ली जानी चाहिए। बिना ऐसा किए सुखद वर्तमान…
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