Tag archives for साहित्य

मेरा गांव, मेरा देश

‘अंतरात्मा की पीड़ित विवेक-चेतना’ के कवि को अलविदा

उदय प्रकाश 'आत्मजयी' वह कविता संग्रह था, जिसके द्वारा मैं कुंवर नारायण जी की कविताओं के संपर्क में आया. तब मैं गाँव में था और स्कूल में पढ़ता था. 'आत्मजयी'…
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माटी की खुशबू

मां की आदत

मां ने पल्लू में अभी तक बांधकर रखी है  मेरी पहली खिलखिलाहट जटामासी जैसे मेरे बालों के गुच्छे पोटली में सहेज रखा है गांव के ब्रह्म बाबा को अर्पित करने…
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चौपाल

‘तुलसीदास’ कविता और सांप्रदायिकता का सवाल

देवांशु झा कवि अज्ञेय ने अपने संस्मरण में लिखा है "निराला के प्रति मेरी धारणा तब तक पूरी तरह बदल चुकी थी। ऐसा 'राम की शक्तिपूजा' और 'सरोज स्मृति' जैसी…
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आईना

विद्रोही कवि रामधारी सिंह दिनकर

ब्रह्मानन्द ठाकुर जी हां , विद्रोही कवि रामधारी सिंह दिनकर। हालांकि मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण पर टिकी इस व्यवस्था के संचालक, आधुनिक राष्ट्रवादियों को दिनकरजी के प्रति मेरा यह…
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मेरा गांव, मेरा देश

लेखक और पत्रकार सबसे आसान शिकार हैं- उदय प्रकाश

गौरी लंकेश की हत्या से देश स्तब्ध है। पत्रकार-साहित्यकार वर्ग सहमा हुआ है। आखिर अभिव्यक्ति की आज़ादी के मतलब क्या हैं? हिंसा और उन्माद के इस दौर में कैसे अपनी…
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बिहार/झारखंड

वंशीपचडा-वह गांव जिसने रामबृक्ष को बेनीपुरी बना दिया

ब्रह्मानंद ठाकुर एक नन्हा -सा टुअर बालक जिसकी मात्र 4 साल की उम्र में मां मर गयी और जब वह 9 वर्ष का था तो पिता भी साथ छोड़ गए।…
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आईना

मित्र

तस्वीर-अजय कुमार कोशी बिहार मित्र करता हूं मैं कई बार तुम्हारी आलोचना वह आलोचना जितनी तुम्हारी होती है उतनी ही मेरी भी ऐसा लगता है मुझको क्योंकि ये शब्द हमेशा…
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परब-त्योहार

स्त्री सृजन के ‘आयाम’ का दूसरा साल

इति माधवी "सुलगते चूल्हे पर स्त्री जब रांधती है भात बटलोही के अदहन से पकते चावल की खदबदाहट हर स्त्री की सृजनात्मकता है" ये कविता का बदलता काल है जो…
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माटी की खुशबू

‘सुन्नर नैका’-तटबंधों को तोड़ती एक प्रेम कथा

 पशुपति शर्मा सुन्नर नैका। कोसी मइया की धाराओं और उसके प्रवाह की तरह कई तरह की अनिश्चितताओं और आवेग के साथ आगे बढ़ती कथा है। कोसी मइया को लेकर प्रचलित लोक…
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आईना

मछलियां

मछली का मायका नहीं होता उसे ब्याह कर ससुराल नहीं जाना पड़ता उसका मरद उसे छोड़ कमाने बाहर नहीं जाता बच्चे भी हमेशा आस-पास ही रहते हैं कितना सुंदर है…
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