Tag archives for साहित्य

मेरा गांव, मेरा देश

… और मां के साथ मर गया मनुष्य

देवांशु झा बेटे ने बूढ़ी मां से कहा मां चलो, सूर्य नमस्कार करते हैं लगभग अपंग मां सहज तैयार हुई बहू ने खुश होकर दरवाजा खोला बेटे ने मां को…
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आईना

देहरादून में सृजन का सादगी भरा साहित्य उत्सव

प्रियदर्शन साहित्य समारोह अक्सर अपनी भव्यता और भटकावों में मुझे अरुचिकर लगते रहे हैं। इन समारोहों में साहित्य और विचार पीछे छूट जाते हैं और ग्लैमर और चकाचौंध का शोर…
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परब-त्योहार

गए साल को चरण स्पर्श

नीलू अग्रवाल विदा, विदा, विदा...अलविदा। अब मिलेंगे नहीं कभी नहीं हमें है पता। हँसते हुए, फिर भी देते हैं विदा। तुम जाओ यही नियति है। वह आएगा कुनकुनाता, गुनगुनाता चुलबुलाता…
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माटी की खुशबू

छांव

मृदुला शुक्ला छाँव कहाँ होती है  अकेली खुद में कुछ  ये तो पेड़ों पर पत्तियों का  दीवारों पर छत का  वजूद भर है पतझड़ में पेड़ों से नहीं झरती  महज…
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माटी की खुशबू

‘अंतरात्मा की पीड़ित विवेक-चेतना’ के कवि को अलविदा

उदय प्रकाश 'आत्मजयी' वह कविता संग्रह था, जिसके द्वारा मैं कुंवर नारायण जी की कविताओं के संपर्क में आया. तब मैं गाँव में था और स्कूल में पढ़ता था. 'आत्मजयी'…
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माटी की खुशबू

मां की आदत

मां ने पल्लू में अभी तक बांधकर रखी है  मेरी पहली खिलखिलाहट जटामासी जैसे मेरे बालों के गुच्छे पोटली में सहेज रखा है गांव के ब्रह्म बाबा को अर्पित करने…
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चौपाल

‘तुलसीदास’ कविता और सांप्रदायिकता का सवाल

देवांशु झा कवि अज्ञेय ने अपने संस्मरण में लिखा है "निराला के प्रति मेरी धारणा तब तक पूरी तरह बदल चुकी थी। ऐसा 'राम की शक्तिपूजा' और 'सरोज स्मृति' जैसी…
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आईना

विद्रोही कवि रामधारी सिंह दिनकर

ब्रह्मानन्द ठाकुर जी हां , विद्रोही कवि रामधारी सिंह दिनकर। हालांकि मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण पर टिकी इस व्यवस्था के संचालक, आधुनिक राष्ट्रवादियों को दिनकरजी के प्रति मेरा यह…
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मेरा गांव, मेरा देश

लेखक और पत्रकार सबसे आसान शिकार हैं- उदय प्रकाश

गौरी लंकेश की हत्या से देश स्तब्ध है। पत्रकार-साहित्यकार वर्ग सहमा हुआ है। आखिर अभिव्यक्ति की आज़ादी के मतलब क्या हैं? हिंसा और उन्माद के इस दौर में कैसे अपनी…
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बिहार/झारखंड

वंशीपचडा-वह गांव जिसने रामबृक्ष को बेनीपुरी बना दिया

ब्रह्मानंद ठाकुर एक नन्हा -सा टुअर बालक जिसकी मात्र 4 साल की उम्र में मां मर गयी और जब वह 9 वर्ष का था तो पिता भी साथ छोड़ गए।…
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