“सर… मेरी बात पहले सुन लीजिए, तब कुछ कहिएगा”

लॉक डॉउन के शुरुआती दिनों से ही मैं विभिन्न संचार माध्यमों से देश के अलग अलग हिस्सों में रह रहे

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‘पुलिस’ को ‘दोस्त’ बनाने का संकल्प… मुबारक हो!

सत्येंद्र कुमार यादव गांवों में आज भी पुलिस कमोबेश ‘दहशत’ और ‘दमन’ की छवि से उबर नहीं पाई है। ख़ास

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पहली कामयाबी…बड़ा लक्ष्य बाकी है!

अक्सर देखा जाता है सरकारी नौकरी मिलने के बाद बहुत से लोग उसी में सिमट जाते हैं और आगे बढ़ने

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एसिड से भी खाक नहीं कविता का सौंदर्य!

प्रतिभा ज्योति   लोग अक्सर सोशल साइटस पर अपने आकर्षक और खूबसूरत तस्वीरें पोस्ट किया करते हैं। पोस्ट के बाद

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