Tag archives for रांची

आईना

मुसाफ़िर! वो छुक-छुक कभी तो लौटेगी

प्रवीण कुमार ट्रेन से सफर एक घर बसाने जैसा है, समाज में जीने जैसा है, और इसकी खिड़कियों से झांकना दुनिया से बातें करने जैसा है । खामोश पसंद हों…
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गांव के नायक

कितने शहरों में कितने माही गुम हो गए !

राकेश कायस्थ हर फिल्मी कहानी में थोड़ा-बहुत हिस्सा हमारी अपनी जिंदगिंयों का भी होता है। महेंद्र सिंह धोनी की अनकही कहानी देखते हुए यादों के बहुत से पुराने पन्ने खुल गये।…
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