Tag archives for रंगकर्म

चौपाल

बनारस में कथानक को इम्प्रेशन में बदलता ‘मैकबेथ’

संगम पांडेय व्योमेश शुक्ल की नई प्रस्तुति ‘बरनम वन’ का कलेवर मैकबेथ की तमाम होती रही प्रस्तुतियों में काफी मौलिक और नया है। यह खाली-मंच पर पश्चिमी ऑपेरा की मानिंद…
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परब-त्योहार

‘एक दिन के मेहमान’ के मेजबानों का शुक्रिया

पशुपति शर्मा   अभिनेता, नाटकों के बाद हमेशा आत्ममुग्ध हो जाया करते हैं। कभी-कभी मैं भी इसका शिकार हो जाता हूं। लेकिन मुझे इसका बखूबी एहसास है कि रंगमंच एक…
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मेरा गांव, मेरा देश

ग़ाज़ियाबाद में आज ‘एक दिन के मेहमान’ का मंचन

  गाजियाबाद के इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज में आज दिनांक 17 जून दिन रविवार की शाम 7 बजे एक दिन का मेहमान की प्रस्तुति की जा रही है। संस्कृति मंत्रालय, केंद्र…
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चौपाल

18 साल की उम्र में ‘बजाया राजा का बाजा’

अनिल तिवारी वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल तिवारी की ये सीरीज फेसबुक पर आ  रही है और उसे देर-सवेर हम भी बदलाव पर साझा कर रहे हैं। वो इस सीरीज में 50…
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महानगर

य़थार्थवाद के ठप्पे को ध्वस्त करता रवि तनेजा का कोणार्क

संगम पांडेय रवि तनेजा की प्रस्तुति कोणार्क अकेला ऐसा नाटक है जिसे मैंने देखने के पहले ही पढ़ रखा था। कुछ लोग इसे व्यवस्थित ढंग से लिखा गया हिंदी का…
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आईना

रंगकर्म की दुनिया, निजी ज़िंदगी और स्त्री पात्र

अनिल तिवारी वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल तिवारी अपने रंगकर्म के 50 बरस के अनुभवों को फेसबुक पर साझा कर रहे हैं। हम इस सीरीज को बदलाव के पाठकों के साथ साझा…
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आईना

लड़की खोजो अभियान में दर-दर भटका रंगकर्मी

अनिल तिवारी छोटे शहरों में नाटकों के लिये महिला कलाकारों की हरदम कमी रही है। इस भीषण कमी का सामना एक समय बीआईसी को भी करना पड़ा। यह बीआईसी के…
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परब-त्योहार

राजा शिव छत्रपति सिर्फ महानाट्य नहीं है!

सच्चिदानंद जोशी जो लोग राजा शिव छत्रपति को सिर्फ एक महानाट्य मान कर देखने जा रहे हैं, वो एक भारी भूल कर रहे हैं। राजा शिव छत्रपति एक नाटक से…
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आईना

3 घंटे और 2 इंटरवल वाले नाटकों का दौर

अनिल तिवारी मेरे कुछ मित्रों ने एपीसोड 8 के बाद पूछा कि बीआईसी  किस तरह के नाटक किया करती थी? तो मैं सभी मित्रों को बता देना चाहता हूँ कि…
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परब-त्योहार

व्यक्ति की इच्छाओं का द्वंद्व- हयवदन

संगम पांडेय अक्षरा थिएटर में लाइट्स वगैरह की कई असुविधाएँ भले हों, पर इंटीमेट स्पेस में प्रस्तुति का घनत्व अपने आप काफी बढ़ जाता है। फिर वशिष्ठ उपाध्याय की प्रस्तुति…
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