Tag archives for मीडिया

सुन हो सरकार

कोरोना की जंग में बिना तैयारी वाले मीडिया के लड़ाके

महेंद्र सिंह के फेसबुक वॉल से साभार अब मीडिया वालों के घर भी corona पहुंच चुका है, फिर भी कुछ मीडिया संस्थान अभी नहीं समझ रहे हैं, भोपाल में जिस…
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आईना

कौशलेंद्र- एक धीमी मौत के लिए आश्वस्त हैं हम सभी

कौशलेंद्र प्रपन्ना पशुपति शर्मा शनिवार, सुबह… एक मित्र से सुना था उसका नाम-कौशलेंद्र। बहुत कुछ नहीं जानता, उसके बारे में। मित्र ने बताया- शिक्षा के क्षेत्र का 'एक्टिविस्ट' था। किसी…
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बिहार/झारखंड

चित्रा, कुछ तो लोग कहेंगे…

आनंद बक्षी साहब इस देश को गजब समझते थे तभी लिखा था 'कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना'। लगातार देख रहा हूं कि Chitra Tripathi की एक तस्वीर पर…
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चौपाल

दम तोड़ता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ

वीरेन नंदा/ वर्तमान समय में लोकतंत्र का चौथा खंभा पूरी तरह जमींदोज नजर आ रहा है। एक वह समय था जब कोई मंत्री या सरकार किसी पत्रकार की तारीफ गलती…
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मेरा गांव, मेरा देश

क्यों विपक्ष और जनपक्ष हो जाना ही निष्पक्ष पत्रकारिता है?

पुष्यमित्रजब मैं लिखता हूं कि पत्रकार का काम शास्वत विपक्ष हो जाना है तो कई मित्र को आपत्ति होती है। उन्हें लगता है कि पत्रकारों को सरकार के काम काज…
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चौपाल

दीपक चौरसिया- सफरनामे में तालियों का शोर और सन्नाटा

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार। दीपक चौरसिया। पत्रकारिता का एक बड़ा नाम। मैं और मेरे हम-उम्र साथी जिस दौर में पत्रकारिता में प्रवेश का द्वार तलाश रहे थे,…
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मेरा गांव, मेरा देश

टीवी की डिबेट का स्तर चौक-चौराहे की चर्चा से भी बदतर-सच्चिदानंद जोशी

बदलाव प्रतिनिधि, गाजियाबाद प्रेस की स्वतंत्रता एवं मीडिया का आत्म नियमन विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया संगोष्ठी गाजियाबाद के वैशाली में हुई। निस्कार्ट मीडिया कॉलेज, वैशाली गाजियाबाद और यूरेका…
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बिहार/झारखंड

स्वतंत्र पत्रकारिता के नए प्रयोग पर निकल पड़ा है पथिक पुष्यमित्र

फाइल फोटो देश में चुनाव आने वाला है। सरकार अपना गुणगान करने में लगी है और विपक्ष सवाल उठाने में जुटा है । ऐसे में मीडिया का रोल अहम हो…
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आईना

निखिल दुबे पर पूरी हुई इंडिया न्यूज की ‘तलाश’

टीम बदलाव 20 नवंबर को इंडिया न्यूज़ के साथ निखिल दुबे ने बतौर एग्जीक्यूटिव एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत कर सबको हैरत में डाल दिया । उन्हें आउटपुट की…
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मेरा गांव, मेरा देश

विज्ञापन का चाबुक और पत्रकारों का संकट

पुष्यमित्र अमूमन ऐसे मौके कम ही आते हैं, जब पत्रकारों के संकट के बारे में बातें होती हैं। हालांकि पत्रकारिता का संकट इन दिनों जेरे-बहस है और इस देश में…
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