ब्रह्मानंद ठाकुर जहां तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सिरे से नकारते हुए अंधविश्वास, कूपमंडूकता  और अतार्किक मानसिकता को बढावा देकर आर्थिक और सामाजिक विषमता की खाई चौड़ी करने में ही…
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