नन्हीं पीहू से प्यार और विनोद कापड़ी का पागलपन

विनोद कापड़ी फ़िल्म रिलीज़ होने में अब कुछ दिन बाक़ी हैं।अब पीहू फ़िल्म से जुड़ी कुछ कहानियाँ। सबसे पहले कैसे

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दलितों का रोजमर्रा का संघर्ष -“लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट ”

चित्रा अग्रवाल मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई करने वाले अच्छे से जानते हैं कि सिनेमा बस मनोरंजन नहीं बल्कि अपनी बात

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वो ‘लम्हे’, ‘चांदनी’ यादें और ‘सदमा’

विकास मिश्रा 13 साल उम्र रही होगी, तब गांव में रेडियो ही मनोरंजन का पूर्ण साधन था। रेडियो सिलोन पर

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पद्मावत का नाम ‘खिलजावत’ क्यों न रखा ?

विकास मिश्र ‘पद्मावत’ देखकर लौटा हूं वो भी 3डी में। तीन घंटे लंबी इस फिल्म का नाम तो असल में

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कुंदन शाह को ‘जाने भी दो यारों’

मयंक सक्सेना कुंदन शाह से दिल्ली में एक पत्रकार के तौर पर मिलना हुआ। पहली बार जब मिला था, तो छात्र

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कृष्ण से सम्मोहन वाला सितारा अब गगन में चमकेगा!

देवांशु झा ऐसा सितारा कभी-कभार चमकता है, जिसमें किसी हॉलीवुड हंक सी अदा हो, किसी आदर्श पौराणिक भारतीय चरित्र जैसा सुघड़

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