“सर… मेरी बात पहले सुन लीजिए, तब कुछ कहिएगा”

लॉक डॉउन के शुरुआती दिनों से ही मैं विभिन्न संचार माध्यमों से देश के अलग अलग हिस्सों में रह रहे

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मुजफ्फरपुर में दो दिवसीय ग्राम समागम

टीम बदलाव, मुजफ्फरपुर गांधी चाहते थे कि इस देश के युवा एक निश्चित लक्ष्य लेकर गांवों में जायें और वहां

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चमकी बुखार की रिपोर्ट- नौनिहालों की मौत रोकने की एक कोशिश

ब्रह्मानंद ठाकुर मुजफ्फरपुर और इसके आस- पास के  जिले वैशाली, सीतामढी, समस्तीपुर, शिवहर आदि प्रति वर्ष अप्रैल और मई महीने

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घाटों पर तीन दिन की ‘चांदनी’, फिर अंधेरी रात…

पुष्यमित्र छठ जीवित देवताओं का पर्व है। यह सिर्फ सूर्योपासना का ही पर्व नहीं है, जल धाराओं की उपासना का

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मुजफ्फरपुर आइए और मदद कीजिए

पुष्यमित्र मुजफ्फरपुर को लेकर आप बहुत परेशान हैं? अगर हां तो इनमें से एक काम कीजिये- 1. सीधे मुजफ्फरपुर आईये,

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मुजफ्फरपुर में भूखों का पेट भरने वालों को धमकी क्यों ?

कुंदन कुमार के फेसबुक वॉल से साभार बीते दिनों मुजफ्फरपुर में लगातार हो रहे हत्या,लूट-डकैती,बालिका गृह कांड आदि जघन्य घटनाओं

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सूखा है तो है, उन्हें तो सिर्फ सत्ता से मतलब है!

पुष्यमित्र / इन दिनों बिहार समेत लगभग पूरा देश भीषण सूखे का सामना कर रहा है, अगर 5-7 फीसदी लोगों

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काम पूरा लेंगे, लेकिन दाम अधूरा देंगे…वाह रे हमारी लोकतांत्रिक सरकार !

सुधांशु कुमार वर्षों की सुनवाई,  उसके दौरान शिक्षकों के प्रति जजों की पूरी सहानुभूति,  शिक्षकों के खून-पसीने की कमाई के

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बिहार में मतदाताओं की उदासीनता कहीं ‘सियासी खिचड़ी’ तो नहीं पका रही ?

पुष्यमित्र एक मित्र ने फोन करके पूछा, कल पहले चरण का प्रचार खत्म हो जायेगा। अब बताइये क्या माहौल है?

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