य़थार्थवाद के ठप्पे को ध्वस्त करता रवि तनेजा का कोणार्क

संगम पांडेय रवि तनेजा की प्रस्तुति कोणार्क अकेला ऐसा नाटक है जिसे मैंने देखने के पहले ही पढ़ रखा था।

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