Tag archives for पूर्णिया

बिहार/झारखंड

बिहार के नव-उदय की स्ट्रेटजी बनी, असर भी दिखेगा

बदलाव प्रतिनिधि, पटना   8-9 वर्ष पूर्व पूर्णिया की एक दुकान पर बैठे-बैठे कुछ युवाओं ने बेहद अनौपचारिक सी मुलाकात में एक शुरुआत की थी, तो उन्हें भी ये एहसास…
और पढ़ें »
माटी की खुशबू

पूर्णिया में ‘गोकुल का छोरा, बरसाने की नार’

डॉ शंभु लाल वर्मा ‘कुशाग्र’ "एक डाल दो पाच्छी है बैठा कौन गुरु कौन चेला/ गुरु की करनी गुरु भरेगा चेला की करनी चेला /उड़ जा हंस अकेला" - कबीर…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

संतूर वादन से झंकृत हो गए पूर्णिया के तार

डॉ शंभु लाल वर्मा 'कुशाग्र' पूर्णिया के विद्या विहार इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नलॉजी में स्पीक मैके की ओर से संतूर वादन की प्रस्तुति हुई। अंतरर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अभय रुस्तम सपूरी ने…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

काव्य फूलों की तरल मुस्कान से पट गई पूर्णिया की धरती

शंभु कुशाग्र नववर्ष 2018 की पूर्व संध्या पर पुराने साल को विदाई देने और नए साल के स्वागत में पूर्णिया के साहित्यकार भारतीय लेखक मंच के बैनर तले स्थानीय जिला…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

पूर्णिया के सरवर ने छत पर ला दी बहार

बासु मित्र कहते हैं जहां चाह होती है, राह खुद ब खुद मिल जाती है। बिहार के पूर्णिया जिले के सबसे व्यस्ततम इलाके लाइन बाजार में जहां इंच-इंच जमीन की…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

पूर्णिया के ‘ड्रीम कैचर’ का सपना सच होने को है!

एपी यादव ड्रीम कैचर के निर्देशक संतोष शिवम, अभिनेता धर्मेंद्र के साथ आम इंसान हो या फिर खास, गरीब या फिर अमीर हर किसी में एक समानता जरूर होती है…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

पूर्णिया के धनखेता बन गए मक्का लैंड

पुष्यमित्र अगर आज हमारे कोसी के इलाके में दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की शूटिंग हुई होती तो शाहरुख और काजोल सरसों के बदले मक्के के खेतों में रोमांस करते नजर…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

पूर्णिया के रुपौली में डायन बता कर मार डाला!

पुष्यमित्र मैं यह शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाहता था, मगर मजबूरी में करना पड़ा कि हमारे गंवाई समाज की जहालत खत्म होने का नाम नहीं ले रही। पूर्णिया जिले के…
और पढ़ें »

पूर्णिया में दहशत में क्यों है एक दलित परिवार?

बासु मित्र पूर्णिया के मरंगा गांव और न्यू सिपाही टोला के बीच के बियाबान में बने एक झोपड़े के आगे एक टैंट लगा है। इस टेंट के नीचे एक एसआई और…
और पढ़ें »

मालदा से पूर्णिया तक ‘आग’ पर कोई न सेंके अपनी ‘रोटी’

कहां छिप गए वे सेक्युलर, मानवतावादी... ! पद्मपति शर्मा (फेसबुक वॉल पर) पद्मपति शर्मा मालदा के बाद पूर्णिया ! यह हो क्या रहा है ? क्या सहिष्णुता सिर्फ उस बहुसंख्यक…
और पढ़ें »
12