Tag archives for पत्रकारिता

मेरा गांव, मेरा देश

अखबार के जरिए यथार्थ से जुड़ना, एक मुगालता- आलोक श्रीवास्तव

पशुपति शर्मा पत्रकारिता में वैश्वीकरण के बाद एक नया बदलाव आया है। वो समाज के बड़े मुद्दों पर बात नहीं करती, समाज सापेक्ष न हो कर वो सिविक समस्याओं पर…
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चौपाल

मीडिया को फिर से पत्रकारिता बनाने की लड़ाई कलम के नाम उधार है

ब्रह्मानंद ठाकुर अपने देश के मीडिया जगत में इन दिनों जो घटनाएं घट रही हैं, वह आकस्मिक नहीं कही जा सकती। इसका ताना-बाना तो काफी पहले ही बुना जा चुका…
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बिहार/झारखंड

घोंचू उवाच- जैसी बहे बयार ,पीठ तब तैसी दीजिए

ब्रह्मानंद ठाकुर घोंचू भाई खेती - पथारी का काम निबटा कर शाम होते ही मनकचोटन भाई के दरबाजे पर जुम गये। मनकचोटन भाई का दरबाजा  टोले के बुजुर्गों का एक…
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चौपाल

अतिवादों के दौर का जनक है पूजीवादी अर्थतंत्र-ब्रह्मानंद ठाकुर

ब्रह्मानंद ठाकुर विनय तरुण स्मृति व्याख्यान 2018 का विषय है- अतिवादों के दौर में पत्रकारिता और गांधीवाद। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि साहित्य, कला, संस्कृति, नीति-नैतिकता, चिंतन और…
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चौपाल

अतिवादों के दौर में पत्रकारिता और गांधीवाद

मोनिका अग्रवाल जब हम किसी से पूछे कि  वर्तमान में हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता का काल कैसा है ? शायद जो जवाब मिले वो ऐसा हो- पतनशील, विकासहीन, लक्ष्यविहीन, अराजकतापूर्ण…
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परब-त्योहार

कोलकाता में 24 जून को विनय तरुण स्मृति व्याख्यान

विनय तरुण स्मृति व्याख्यान - 2018 का आयोजन कोलकाता में 24 जून 2018 रविवार को होगा। इस बार का विषय है 'अतिवादों के दौर में पत्रकारिता और गांधीवाद'. इस विषय पर…
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अतिथि संपादक

बदलाव के अतिथि संपादक की मीडिया से अपेक्षाएं और उनके संकल्प

डाॅ. संजय पंकज मीडिया की महती भूमिका से आज सम्पूर्ण विश्व सुपरिचित है। दिनानुदिन नई-नई तकनीकों और सुविधाओं से लैस होता हुआ मीडिया-जगत संसार के कोने-कोने तक अपनी पैठ बना…
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बदलाव की पाठशाला

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश से बातें आज सुबह 11 बजे

  बदलाव टीम वरिष्ठ पत्रकारों से मुलाकात और अनौपचारिक बातचीत का सिलसिला शुरू आज से कर रही है। हमें खुशी है कि इस सिलसिले की शुरुआत हम वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश…
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मेरा गांव, मेरा देश

सरकार को एहसास नहीं-भूख क्या होती है?

शिरीष खरे शिरीष खरे की बतौर पत्रकार यात्रा की ये चौथी किस्त है। मेलघाट में उन्होंने महसूस किया कि भूख क्या होती है? विचार यात्रा का सिलसिला फिर से शुरू…
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चौपाल

मेलघाट में भूख से मरते बच्चे और 90 के दशक का सन्नाटा

शिरीष खरे मेलघाट में शिरीष, साल 2008 शिरीष खरे की बतौर पत्रकार यात्रा की ये तीसरी किस्त है। मेलघाट से लौटते हुए ट्रेन में उनकी विचार यात्रा का सिलसिला फिर…
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