Tag archives for पत्रकारिता

सुन हो सरकार

सत्ता जानती है पत्रकार की औकात क्या है ?

पुष्य मित्रपिछ्ले साल का वाकया है। एक बड़े मीडिया हाउस से मुझे फोन आया कि वे चाहते हैं कि मैं उनके नए वेन्चर का रीजनल हेड(पूर्वी जोन) बन जाऊं, इसलिये…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

क्यों विपक्ष और जनपक्ष हो जाना ही निष्पक्ष पत्रकारिता है?

पुष्यमित्रजब मैं लिखता हूं कि पत्रकार का काम शास्वत विपक्ष हो जाना है तो कई मित्र को आपत्ति होती है। उन्हें लगता है कि पत्रकारों को सरकार के काम काज…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

बदलते दौर में पत्रकारिता के चाल-चरित्र और चेहरे की झलक

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार मेरा मानना है, किसी लेखक, बुद्धिजीवी, एकेडेमिक, सामाजिक या राजनीतिक कार्यकर्ता की तरह एक सक्रिय पत्रकार, खासतौर पर रिपोर्टर या एंकर को…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

स्वतंत्र पत्रकारिता के नए प्रयोग पर निकल पड़ा है पथिक पुष्यमित्र

फाइल फोटो देश में चुनाव आने वाला है। सरकार अपना गुणगान करने में लगी है और विपक्ष सवाल उठाने में जुटा है । ऐसे में मीडिया का रोल अहम हो…
और पढ़ें »
चौपाल

अखबार के जरिए यथार्थ से जुड़ना, एक मुगालता- आलोक श्रीवास्तव

पशुपति शर्मा पत्रकारिता में वैश्वीकरण के बाद एक नया बदलाव आया है। वो समाज के बड़े मुद्दों पर बात नहीं करती, समाज सापेक्ष न हो कर वो सिविक समस्याओं पर…
और पढ़ें »
चौपाल

मीडिया को फिर से पत्रकारिता बनाने की लड़ाई कलम के नाम उधार है

ब्रह्मानंद ठाकुर अपने देश के मीडिया जगत में इन दिनों जो घटनाएं घट रही हैं, वह आकस्मिक नहीं कही जा सकती। इसका ताना-बाना तो काफी पहले ही बुना जा चुका…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

घोंचू उवाच- जैसी बहे बयार ,पीठ तब तैसी दीजिए

ब्रह्मानंद ठाकुर घोंचू भाई खेती - पथारी का काम निबटा कर शाम होते ही मनकचोटन भाई के दरबाजे पर जुम गये। मनकचोटन भाई का दरबाजा  टोले के बुजुर्गों का एक…
और पढ़ें »
चौपाल

अतिवादों के दौर का जनक है पूजीवादी अर्थतंत्र-ब्रह्मानंद ठाकुर

ब्रह्मानंद ठाकुर विनय तरुण स्मृति व्याख्यान 2018 का विषय है- अतिवादों के दौर में पत्रकारिता और गांधीवाद। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि साहित्य, कला, संस्कृति, नीति-नैतिकता, चिंतन और…
और पढ़ें »
चौपाल

अतिवादों के दौर में पत्रकारिता और गांधीवाद

मोनिका अग्रवाल जब हम किसी से पूछे कि  वर्तमान में हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता का काल कैसा है ? शायद जो जवाब मिले वो ऐसा हो- पतनशील, विकासहीन, लक्ष्यविहीन, अराजकतापूर्ण…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

कोलकाता में 24 जून को विनय तरुण स्मृति व्याख्यान

विनय तरुण स्मृति व्याख्यान - 2018 का आयोजन कोलकाता में 24 जून 2018 रविवार को होगा। इस बार का विषय है 'अतिवादों के दौर में पत्रकारिता और गांधीवाद'. इस विषय पर…
और पढ़ें »
12