Tag archives for नाटक

आईना

‘खिड़की’ से झांकता लेखक और वो लड़की

संगम पांडेय विकास बाहरी के नाटक ‘खिड़की’ में कथानक के भीतर घुसकर उसकी पर्तें बनाने और खोलने की एक युक्ति है। यह मंच पर मौजूद मुख्य पात्र के भ्रम और…
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माटी की खुशबू

बात निकली तो है… कितनी दूर तलक पहुंची?

नीतू सिंह कुछ बातें ऐसी होती हैं, तो दिल की गहराइयों से छूकर निकलती हैं और बड़ी दूर तक अपनी छाप छोड़ती है। राजधानी दिल्ली के श्रीराम सेंटर में इस…
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आईना

रंगमंच पर साकार राजकमल चौधरी की ‘मल्लाह टोली’

संगम पांडेय नीलेश दीपक की प्रस्तुति ‘मल्लाह टोली’ एक बस्ती का वृत्तचित्र है। ‘कैमरा’ यहाँ ठहर-ठहरकर कई घरों के भीतर जाता है, और एक छोटे से परिवेश में तरह-तरह के…
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अतिथि संपादक

कनुप्रिया ने याद दिला दिए रामलीला वाले दिन

ब्रह्मानंद ठाकुर बात उन दिनो की है जब देश को आजाद हुए दस -बारह साल ही हुए थे। गांव सच्चे अर्थों में गांव था। आडम्बर, तड़क-भड़क और दिखावे से काफी…
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माटी की खुशबू

आजमगढ़ का शारदा टाकीज बना रंगमंच का नया ठीहा

संगम पांडेय आजमगढ़ के उजाड़ और खस्ताहाल शारदा टाकीज को अभिषेक पंडित और ममता पंडित ने रंगमंच के लोकप्रिय ठीहे में बदल दिया है। सिनेमा मालिकों से पाँच साल के…
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आईना

इंटरनेट के दौर में दो पीढ़ियों के दो अलग-अलग युग

संगम पांडेय जो दर्शक वही-वही नाटक देख-देख कर ऊब चुके हों उन्हें निर्देशक सुरेश भारद्वाज की प्रस्तुति ‘वेलकम जिंदगी’ देखनी चाहिए। इसमें परिहास का पुट देते हुए आज के मध्यवर्गीय…
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रायपुर में ‘मोचीराम’ की चीख और चुप्पी

टीम बदलाव "बाबूजी सच कहूं, मेरी निगाह में न कोई छोटा है न कोई बड़ा, मेरे लिए हर आदमी एक जोड़ी जूता है, जो मेरे सामने मरम्मत के लिए खड़ा…
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