कौशलेंद्र- एक धीमी मौत के लिए आश्वस्त हैं हम सभी

पशुपति शर्मा शनिवार, सुबह… एक मित्र से सुना था उसका नाम-कौशलेंद्र। बहुत कुछ नहीं जानता, उसके बारे में। मित्र ने

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भारत की समकालीन राजनीति और अविश्वसनीयता का ताना-बाना !

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से कभी-कभी भारतीय राजनीति और उस पर अपने नियमित लेखन से मन उचटने लगता

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शुक्र है इंसानियत आज भी जिंदा है

अर्वित राज दिल्ली-NCR की भागदौड़ भरी जिंदगी कितनी तनाव पूर्ण होती है ये बात किसी से छिपी नहीं है। ना

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य़थार्थवाद के ठप्पे को ध्वस्त करता रवि तनेजा का कोणार्क

संगम पांडेय रवि तनेजा की प्रस्तुति कोणार्क अकेला ऐसा नाटक है जिसे मैंने देखने के पहले ही पढ़ रखा था।

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विद्रोह समाप्त, अब विद्रोह का माफी-राग!

धीरेंद्र पुंडीर एक के बाद एक माफी का सिलसिला चल निकला। याद है कि इस शख्स ने मुख्यमंत्री पद की

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दिल्ली को गैस चैंबर में रहना पसंद है ?

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है । बर्दाश्त करने की क्षमता से कई गुना प्रदूषण बढ़

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दिल्ली के SDM प्रशांत, जो सेवा में ढूंढते हैं सुकून

अरुण प्रकाश आए दिन देश में धरना-प्रदर्शन हो हंगामा होता रहता है, लेकिन क्या हमने कभी समान शिक्षा और बेहतर

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मुजफ़्फ़रपुर के पियर गांव में भी किस्सों की कार्यशाला

सर्बानी शर्मा ‘आओ पढ़ें, सुनें और सुनाएं किस्से’, बदलाव बाल क्लब की वर्कशॉप अब एक मुहिम का हिस्सा बनती जा

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भीड़ हो तब भी डरो, भीड़ न हो तब भी डरो

भारती द्विवेदी बेंगलुरु की दोनों घटनाएं किसी भी संवेदनशील इंसान को हिला कर रख देती है। अब दिल्‍ली की घटना

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