Tag archives for जेएनयू

गांव के नायक

JNU को समझो और फिर जी चाहे तो लाठी बरसा लेना यारों!

रविकांत जेएनयू एक बार फिर से सुर्खियों में है। जेएनयू में न सिर्फ तीन सौ प्रतिशत फीस वृद्धि की गयी है बल्कि मैस मैनुअल्स को लेकर भी जेएनयू छात्रसंघ और…
और पढ़ें »
गांव के रंग

सरकार कारोबारी बन रही है, JNU की जंग के मायने समझें

पुष्यमित्र अभी जिस ट्रेन से देहरादून से लौट रहा था, वह ट्रेन हावड़ा तक जाती है। जाहिर सी बात है, ट्रेन में कई बंगाली यात्री भी थे। पेन्ट्री कार के…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

शिक्षा का बाजारीकरण एक डरपोक, अवसरवादी और भ्रष्ट समाज पैदा करता है!

पुष्य मित्र JNU छात्रों के आन्दोलन के बीच कुछ लोग IIT-IIM का जिक्र लेकर आ गये हैं कि वहां की फीस तो JNU के मुकाबले कई सौ गुना अधिक है,…
और पढ़ें »
सुन हो सरकार

शिक्षा पर बाज़ार के कब्जे की स्वायत्‍तता

डॉक्टर गंगा सहाय मीणा देश के तमाम अच्‍छे डॉक्‍टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, कुलपति, एकेडमिशियन, आलोचक, प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक इसी देश के सरकारी उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों से निकले हैं। संख्‍या में कम ही सही,…
और पढ़ें »
आईना

पूरे शंख और पुष्प की आभा से कवि केदारनाथ को प्रणाम

यतीन्द्र मिश्र एक शानदार कविता ने जैसे अपना शिखर पा लिया हो। कथ्य की आभा से छिटककर तारे की द्युति सी चमक। केदारनाथ सिंह के निधन का आशय बस इतना भर…
और पढ़ें »
चौपाल

दिल्ली के SDM प्रशांत, जो सेवा में ढूंढते हैं सुकून

अरुण प्रकाश आए दिन देश में धरना-प्रदर्शन हो हंगामा होता रहता है, लेकिन क्या हमने कभी समान शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए संघर्ष किया। अगर किया होता तो…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

पेरियार के आँगन में बहती रही कोसी की धारा

पुष्यमित्र मुझे यह मालूम नहीं था कि पेरियार एक नदी का नाम है जो भारत के दक्षिणवर्ती राज्य केरल में बहती है। मैं यही समझता था कि तमिलनाडु के महान…
और पढ़ें »

एक अधिकारी से झांसी को ‘अनुराग’ हो गया

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय को इन दिनों 'देशद्रोहियों' का अड्डा साबित करने की कोशिश चल रही है। लेकिन इसी विश्वविद्यालय से निकले प्रशासनिक अधिकारी जनता से एक रिश्ता कायम करते हैं-सुख-दुख…
और पढ़ें »

इस्तीफ़ा कुबूल करें ‘जहांपनाह’

एक इस्तीफ़ा, हमेशा एक व्यक्ति का नहीं होता। वो उन तमाम लोगों की भावनाओं की अभिव्यक्ति होता है, जो अपनी सीमाओं की वजह से ख़ामोशी ओढ़े रखते हैं। पत्रकारिता के…
और पढ़ें »

सब ठाठ धरा रह जायेगा…

तू आया है, तो जायेगा हम रोटी–भात खायेगा। तू लोहा–सोना खोदेगा हम खेत में नागर जोतेगा। तू हीरा-पन्ना बेचेगा हम गाछ पे पानी सींचेगा। तू सेल्फी फोटू खींचेगा हम फटा-चिथन्ना…
और पढ़ें »
12