Tag archives for गांव

आईना

‘हिंगोश’ का दिलचस्प किस्सा

ये बात अक्सर कही जाती है, आवश्यकता आविष्कार की जननी है। जैसे ये लकड़ी है। यूँ तो यह किसी पेड़ की शाखा है, लेकिन इस तरह की शाखा को हमारे…
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गांव के रंग

भुजइन के भार के बहाने किस्सा गांव का

रज़िया अंसारी  गांव के लहलहाते हरे भरे खेत, खेतों में सरसों के पीले-पीले फूल, कुएं पर पानी भरती गांव की औरतें, जंगल से लकड़ियों का बोझा सर पर ढोकर लाती…
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मेरा गांव, मेरा देश

गांवों में विकास की धीमी रफ्तार और नौकरशाही का ढुलमुल रवैया

शिरीष खरे  भारतीय प्रशासन का वर्तमान ढांचा ब्रिटिश शासकों से विरासत में मिला है। इसी ढांचे के नीचे गांव का विकास कार्य और जवाबदेही तय की जाती है। हालांकि, समय-समय पर इसमें…
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गांव के रंग

गांव की माटी की महक

श्वेता जया के फेसबुक वॉल से साभार क्या आपने गाँव को करीब से देखा है? खपरैल के घर, फूस की मड़ई, छान छप्पर, खूंटे पर बँधी गाय, भूसहूल, खेतों के…
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गांव के नायक

ऊर्दू की तालीम हासिल करने की ललक

कुमार नरेंद्र सिंह यह बिहार के जिला भोजपुर के संदेश थाना के सिरकीचक गांव की मस्जिद है, जिसका निर्माण 1798 में हुआ था। औरंगजेब के शासन काल के दौरान यह…
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आदर्श गांव पर रपट

मई महीने में बदलाव पर ‘आदर्श गांव पर आपकी रपट’

टीम बदलाव सांसद आदर्श ग्राम इस योजना का नाम तो आप ने भी सुना होगा । चार साल पहले देश में खूब प्रचार-प्रसार भी हुआ । माननीय प्रधानमंत्री जी का…
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मेरा गांव, मेरा देश

क्या जंगलों में आदिवासियों का होना अच्छे पर्यावरण का प्रतीक नहीं?

शिरीष खरे शिरीष खरे की बतौर पत्रकार यात्रा की ये पांचवीं किस्त है। मेलघाट का अनदेखा सच पाठकों तक शिरीष की नजरों से पहुंच रहा है। उनकी विचार यात्रा में…
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मेरा गांव, मेरा देश

चुनावी साल में चलो गांव के विकास का शोर तो है!

बब्बन सिंह मित्रो, हम एक सामान्य व्यक्ति हैं जो संयोग से पत्रकारिता के पेशे में हैं, जैसे आप किसी और पेशे में. हम किसी प्रकार का दंभ नहीं पालते कि…
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मेरा गांव, मेरा देश

मीडिया से गांव गायब बताना आंचलिक पत्रकारिता की अनदेखी है

शिरीष खरे क्या मीडिया से गांव गायब हो गए हैं? जवाब है- हां। यदि कोई एक जगह से एक जगह को उल्टा होकर लगातार इक टक देखे जा रहा हो…
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माटी की खुशबू

सियासी शिकंजे से किसान छूटें तो बदलेगी ज़िंदगी

केदार सिरोही आदिकाल से कृषि हमारे देश की अर्थव्यवथा की रीढ़ की हड्डी रही है। आज वही खुद को बचाने के लिए बदलाव तलाश रही है। देश की अर्थव्यवस्था को…
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