Tag archives for गांव की यादें

बिहार/झारखंड

हमारे दिलों का कोना-कोना नाप चुके हैं सागर बाबा

सुबोध कांत सिंह बात तक की है जब मैं चौथी कक्षा में पढ़ता था। स्कूल में गर्मी की छुट्टी पड़ी तो मेरे चाचा मुझे अपने गांव लेकर आए। इससे पहले…
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माटी की खुशबू

माटी की महक गांव खींच लाती है!

संतोष पाठक के फेसबुक वॉल से गांव का पुराना घर साल दर साल खंडहर हो रहा है। यह मेरे दादा-दादी की विरासत है। जर्जर होते इस घर की दीवारों में, आंगन…
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ओ शहर, गांव से बड़े भय के साथ लौटता हूं

अमित शर्मा अब यहां की धूल में पहले-सी वो महक नहीं। अब यहां के ‘राम-राम’ वाले संबोधन में पहले-सा अपनापन नहीं। अब यहां की बर्फी में पहले-सा वो स्वाद नहीं।…
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