Tag archives for कहानी

माटी की खुशबू

मुंदरी

डॉक्टर प्रीता प्रिया पूर्णिया के चित्रकार राजीव राज की कृति हॉस्टल के लान में पुरवइया सी दौड़ती -भागती, हंसती- खिलखिलाती लड़कियों के झुंड के सामने अचानक ही एक डाकिया डाक…
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बीफ

विवेक मिश्रा अरे यार। नहीं...नहीं...धत। छि:। दुष्यंत श्रीवास्तव ये क्या किया तुमने। यह कहते हुए नाक सिकुड़ी हुई थी मोहन पांडेय की। दुष्यंत - हैरान और अवाक था...जाने कौन सा…
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पगला नथुनिया… तेरा बऊआ आया गांव रे!

  बदलाव के बयार में कहीं टूट ना जाएं संवेदनाओं के तार। तब ये ट्रेन कहां थी गांव जाने के लिए। रामेश्वर घाट पर मिनी बसें छोड़ जातीं और फिर…
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