Tag archives for कविता - Page 3

माटी की खुशबू

छांव

मृदुला शुक्ला छाँव कहाँ होती है  अकेली खुद में कुछ  ये तो पेड़ों पर पत्तियों का  दीवारों पर छत का  वजूद भर है पतझड़ में पेड़ों से नहीं झरती  महज…
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आईना

आत्मवंचना

अखिलेश्वर पांडेय शाबासी की सीढ़ीयां चढ़ते हुए पहुंच गया हूं उस मुकाम पर जहां से सिर्फ भीड़ दिख रही आंखें पारदर्शी हो गयी हैं होठ चुप हैं कानों में 'स्व'…
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माटी की खुशबू

‘अंतरात्मा की पीड़ित विवेक-चेतना’ के कवि को अलविदा

उदय प्रकाश 'आत्मजयी' वह कविता संग्रह था, जिसके द्वारा मैं कुंवर नारायण जी की कविताओं के संपर्क में आया. तब मैं गाँव में था और स्कूल में पढ़ता था. 'आत्मजयी'…
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बिहार/झारखंड

समय ‘वाचाल’ है और कवि ‘मौन’!

पशुपति शर्मा 'समय वाचाल है' इसी शीर्षक से आजतक में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार साथी देवांशुजी का काव्य संग्रह हाथ में आ गया है। इस बार 'साहित्य आजतक' में सम्मिलित होने…
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माटी की खुशबू

मां की आदत

मां ने पल्लू में अभी तक बांधकर रखी है  मेरी पहली खिलखिलाहट जटामासी जैसे मेरे बालों के गुच्छे पोटली में सहेज रखा है गांव के ब्रह्म बाबा को अर्पित करने…
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आईना

मित्र

तस्वीर-अजय कुमार कोशी बिहार मित्र करता हूं मैं कई बार तुम्हारी आलोचना वह आलोचना जितनी तुम्हारी होती है उतनी ही मेरी भी ऐसा लगता है मुझको क्योंकि ये शब्द हमेशा…
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आईना

मछलियां

मछली का मायका नहीं होता उसे ब्याह कर ससुराल नहीं जाना पड़ता उसका मरद उसे छोड़ कमाने बाहर नहीं जाता बच्चे भी हमेशा आस-पास ही रहते हैं कितना सुंदर है…
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आईना

स्कूल की छुट्टी

बदलाव बाल क्लब की कार्यशाला फिलहाल गाजियाबाद के वैशाली में हर दिन शाम 7 बजे लग रही है। बच्चे हर दिन कुछ ना कुछ नया सीख रहे हैं। पटना में भी…
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आईना

ठूंठ समय

अखिलेश्वर पांडेय यह समय एक ठूंठ समय है एक झूठ समय है एक ढीठ समय है जिसके पास सत्ता है पावर पैसा है हांक रहा सबको एक ही चाबुक से…
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आईना

गणतंत्र, तुझसे कुछ शिकवे हैं!

मार्कण्डेय प्रवासी गणतंत्र भूख की दवा ढूंढ कर लाओ बीमार देश है , धन्वन्तर कहलाओ। रह रहे शारदा के बेटे अधपेटे कवि कलम बेच कर पुस्तक छपवाता है अन्याय ,घूस…
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