‘तुलसीदास’ कविता और सांप्रदायिकता का सवाल

देवांशु झा कवि अज्ञेय ने अपने संस्मरण में लिखा है “निराला के प्रति मेरी धारणा तब तक पूरी तरह बदल

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भीड़ की हिंसा पर लीपापोती करना देश के लिए घातक

बदलाव प्रतिनिधि पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में साम्प्रदायिक हिंसा के बाद काफी तनाव है। ये सारा विवाद

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तारिक फतेह को लेकर ‘चिंताओं’ का दौर

धीरेंद्र पुंडीर ये मुजफ्फनगर की तारिक फतेह पर चिंता है। घर आया था लिहाजा सुबह के अखबार में दिखा। ये

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पुराने तैमूर पर नया ‘उन्माद’ कहीं ज़्यादा ख़तरनाक है!

कुमार सर्वेश मुझे आज सोशल मीडिया तैमूर लंग से ज्यादा खतरनाक लगता है। तैमूर तो अपने पेशे से खूंखार था।

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