Tag archives for इंसानियत

गांव के रंग

‘मौलाना जोशी’ ने ‘मुल्क’ से कुछ मांगा है, दे पाओगे?

सच्चिदानंद जोशी कुछ दिन पहले बचपन का एक दोस्त मिला। मेरे रूप को देखते ही बोला "अरे यार तुम तो एकदम बदल गए "। उम्र के साथ शरीर और बाल…
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मेरा गांव, मेरा देश

शुक्र है इंसानियत आज भी जिंदा है

अर्वित राज दिल्ली-NCR की भागदौड़ भरी जिंदगी कितनी तनाव पूर्ण होती है ये बात किसी से छिपी नहीं है। ना किसी को अपने लिये वक्त है और ना ही दूसरों…
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आईना

रहिमन, ये नर जिंदा हैं… जिन मुख निकसत ‘हां’ ही!

विकास मिश्रा हमारे एक पुराने सहयोगी के दोस्त ने उनसे जरूरत पड़ने पर उनकी कार मांग ली थी। उन्होंने कार तो नहीं दी, लेकिन दोस्त के दुस्साहस की चर्चा जरूर…
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