10 अप्रैल 2018, दिन मंगलवार । पीएम मोदी ने चंपारण की धरती से सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह को धार दी और सफाई अभियान को और तेज करने की अपील की । इस मौके पर उन्होंने अपने अभियान की तारीफ करते हुए बताया कि पिछले एक हफ्ते में बिहार में कुल 8 लाख 50 हजार रिकॉर्ड शौचालय बनाए गए हैं । तो चलिए देखते हैं कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की वेबसाइट 10 अप्रैल 2018 के रात 10 बजे तक बिहार के बारे में क्या आंकड़े बता रही है-

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण वेबसाइट का स्क्रिन शॉट ।स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के वेबसाइट पर दावा किया गया है कि बिहार का सासाराम (रोहतास) जिला ओडीएफ के मामले में अव्वल है । यहां के 98.24 फीसदी गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं। दूसरे नंबर पर शेखपुरा जिला है । शेखपुरा के 95.29 गांव ओडीएफ हैं । फिर सीतामढ़ी का नंबर आता है और दावा किया जाता है कि सीतामढ़ी के 78.13 गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं । यानी 100 में से 28 लोग ही खुले में शौच करते हैं । 76.75 फीसदी ओडीएफ के साथ नालंदा चौथे स्थान पर है और मुंगेर के 74.45 गांव ओडीएफ घोषित हो चुके हैं । बिहार के इन पांचों जिलों में स्वच्छ भारत मिशन की सबसे ज्यादा कामयाबी बताई जा रही है ।


समस्तीपुर, औरंगबाद, अरवल, जमुई और अररिया में सबसे कम घरों में शौचालय का निर्माण हुआ है । स्वच्छ भारत मिशन के तहत यहां पर अभी तक 42 फीसदी से कम घरों में शौचालय की व्यवस्था की गई है । वहीं जिस चंपारण की चर्चा एक बार फिर हो चली है वहां पर भी स्थिति बहुत ठीक नहीं है । पूरब चंपारण में 70.42 फीसदी घरों में शौचालय और पश्चिम चंपारण में करीब 52 फीसदी घरों में शौचालय बनाने का लभ्य हासिल कर लिया गया है । अगर वित्तिय वर्ष के हिसाब से देखें तो साल 2014-15 में 1 लाख 33 हजार 997 टॉयलेट बनाए गए । साल 2015-16 में 5 लाख 60 हजार 122 शौचालय, साल 2016-17 में 14 लाख 33 हजार 362 इज्जत घऱ और साल 2017-18 में अब तक 46 लाख 26 हजार 270 टॉयलेट लोगों के घरों में बन कर तैयार हो गए हैं । कुल मिलाकर अब तक 87 लाख से ज्यादा शौचालय बनाने का दावा किया गया है ।

ये दावे अपनी जगह है हकीकत जिनके गांव में, घरों में शौचालय बने हैं वो जानते हैं । अभी हाल ही में कई न्यूज चैनलों ने खुले में शौच मुक्त गांवों का जायजा लिया था । जिसमें पाया गया कि फोटो खींचवाने के लिए शौचालय की तरह ढांचा तैयार कर दिया गया लेकिन वो शौचालय किसी काम के नहीं हैं । यूपी में करीब 10 से ज्यादा जिले ओडीएफ घोषित हो चुके हैं लेकिन जिनके घरों में शौचालय बने हैं वो आज भी खुले में शौच करने जाते हैं । पूछने पर उनका कहना होता कि आधा अधूरा शौचालय निर्माण कराकर कोरम पूरा किया गया है । अब बिहारवासी ही बताएं उनके गांवों, घरों में जो शौचालय बने हैं, जो गांव ओडीएफ घोषित हुए हैं उनकी स्थिति कैसी है ? अगर बिहारवासी अपने जिले के बारे में इससे जुड़ी और जानकारी जानना चाहते हैं तो आप इस लिंक के जरिए जानकारी हासिल कर सकते हैं- http://sbm.gov.in/sbmdashboard/IHHL.aspx

अब एक नजर पूरे देश में बनाए गए शौचालयों के आंकड़ों पर डाल लीजिये । 2 अक्टूबर 2014 से लेकर 10 अप्रैल 2018, रात 10 बजे तक पूरे देश में कुल 6 करोड़ 88 लाख 9 हजार 931 शौचालय बन चुके हैं । साढ़े 6 लाख गांवों में से 3 लाख 46 हजार 905 गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं । जिलों के हिसाब से 365 जिले ओडीएफ घोषित हैं और देश के 14 राज्य ऐसे हैं जहां पर लोग खुले में शौच नहीं करते हैं, उत्तराखंड भी उन्हीं राज्यों में शामिल है । यानी ओडीएफ का जो स्टैंडर्ड तय किया गया है उसे पूरा कर लिया गया है । जो हरे भरे राज्य मैप में दिख रहे हैं समझिए यहां पर शौचालय को लेकर कोई दिक्कत नहीं है । सरकार का लक्ष्य है कि इसी गति से 2 अक्टूबर 2019 तक स्वच्छता अभियान चलाकर पूरे देश को खुले में शौच मुक्त कर दिया जाए । तो आप भी हाथ बढ़ाएं और इस मिशन को कामयाब बनाएं । हां, आंकड़े बनाकर वेबसाइट पर दावा करने वालों की पोल भी खोलिए ।


-सत्येंद्र कुमार यादव

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