बदलाव प्रतिनिधि, दिल्ली

सच्चिदानंद जोशी, कभी आप उनमें एक शिक्षाविद ढूंढ सकते हैं। कभी उनमें आप एक संस्कृतकर्मी तलाश सकते हैं। कभी आप उनमें एक रंगकर्मी को उछाल मारते महसूस कर सकते हैं। वो हमेशा अपनी रचनात्मकता और सृजनात्मकता से आपको चौंकाते हैं। कभी-कभी आपको हैरानी भी हो सकती है कि कोई शख्स कैसे खामोशी से अपनी रचनात्मकता को इस तरह सींचता रह सकता है। कैसे कलाओं के अलग-अलग माध्यमों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा सकता है।

अब बतौर कहानीकार सच्चिदानंद जोशी हमारे सामने आए हैं। उनकी लोकप्रिय कहानियों का पहला संग्रह प्रभात प्रकाशन ने  पाठकों के लिए संवारा है। पुस्तक का विमोचन 27 मई की शाम दिल्ली के साहित्य कला अकादेमी सभागार में हो रहा है। पुस्तक के लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष डॉक्टर कमल किशोर गोयनका करेंगे। लोकापर्ण वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती चित्रा मुदगल करेंगी। कार्यक्रम में अनंत विजय, यतींद्र मिश्र और मालती जोशी के सान्निध्य का लाभ आप भी उठा सकते हैं।

पुस्तक में सच्चिदानंद जोशी की 14 कहानियां संकलित हैं। संकलन की पहली कहानी के शीर्षक से ही वो संवेदना के धरातल पर अपनी विचारशैली को साफ कर जाते हैं- ‘अभी मनुष्य जिंदा है’। हाल के दिनों में विचारधारा के नाम पर जिस तरह की मोर्चाबंदी हो रही है, वैसे में सच्चिदानंद जोशी का ‘मनुष्यता’ पर दिया जाने वाला ये अतिरिक्त बल काफी मायने रखता है।

सच्चिदानंद जोशी ने इंदिरा गांधी नेशनल काउंसिल ऑफ आर्ट्स के सदस्य सचिव की भूमिका में रहते हुए दिल्ली के सांस्कृतिक जगत में एक हलचल पैदा करने की कोशिश की है। उनका मिजाज ही कुछ ऐसा है कि जब अपनी पुस्तक के लोकार्पण की बात आई तो उन्होंने अपनी भूमि छोड़कर साहित्य अकादमी के सभागार को चुना। साहित्य प्रेमियों के लिए ये अवसर सच्चिदानंद जोशी की रचनात्मक दुनिया से रूबरू होने का है तो संस्कृतिकर्मियों के लिए ये मौका सच्चिदानंद जोशी जैसी शख्सियत से कुछ रचनात्मक ऊर्जा हासिल करने का हो सकता है। दोनों ही लिहाज से शनिवार की शाम बेहद अहम है।

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