अजामिल जी के फेसबुक वॉल से साभार

इलाहाबाद के बहुचर्चित छायाकार एस के यादव ने विश्व के सबसे बड़े अध्यात्मिक कुंभ मेले का अभिनंदन कुंभ की स्मृतियों को सहेजे लगभग 100 जीवंत तस्वीरों की एक प्रदर्शनी लगाकर किया और सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया । लगभग 25 वर्षों के बाद एस के यादव का बेहतरीन काम एक बार फिर फोटोग्राफी के प्रेमियों को इलाहाबाद के निराला सभागार और आर्ट गैलरी में देखने को मिला। इसमें कोई शक नहीं कि पिछले 25 वर्षों में एस के यादव ने फोटोग्राफी को फोटोग्राफी की शिवा से निकाल कर और बड़े फलक पर लाने में कामयाबी हासिल की है और अब उनके चित्र देखने योग्य से ज्यादा पढ़ने योग्य हो गए हैं। उनके चित्रों पर अब विमर्श की स्थिति बन गई है । उनके चित्रों में सिर्फ सौंदर्य ही नहीं दिखाई दे रहा है बल्कि हम उसमें अपनी गौरवशाली परंपराओं को धड़कता हुआ महसूस कर सकते हैं। एस के यादव की तस्वीरें हमारे समय की साक्षी है और कल का इतिहास जो हमारे बच्चों को बहुत कुछ सोचने पर महसूस करेगा।

जो लोग तकनीकी रूप से एस के यादव की तस्वीरों को परखने की कोशिश करेंगे वह तस्वीरों को आधे अधूरे पैमाने पर ही देख पाएंगे। दरअसल एस के यादव की तस्वीरें देखने वाले से विषय में प्रवेश करने की अपेक्षा करती हैं। एस के यादव की कुंभ विषयक तस्वीरें एक ऐसे निबंध के रूप में हमारे सामने उभरती हैं जो हमें सोचने पर विवश करता है। इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए गए एस के यादव के बहुत से चित्र फोटोग्राफी के अंतरराष्ट्रीय मानकों के बहुत करीब पहुंच गए हैं और इसमें कोई संदेह नहीं कि इन्हें देखने वाले लोग इन चित्रों को उसी अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत देखेंगे और एक अलग आनंद उठाएंगे इसमें कोई शक नहीं कि एस के यादव ने प्रतीक्षा कराई लेकिन इन यादगार चित्रों के साथ उनका आगमन भरपूर स्वागत के योग्य है। एस के यादव अपने इन चित्रों के साथ गहरे सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े दिखाई दे रहे हैं। तस्वीरों को क्लिक करने का उनका नजरिया उन्हें फोटोग्राफर के दायरे से निकाल कर उन्हें साहित्यकार के दायरे में खड़ा कर देता है और यह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण बात है।

कला के जरिए जो लोग भी समाज के हित की बात करते हैं और सोचते हैं वे सभी साहित्यकार हैं । इस रूप में हम एस के यादव को साहित्यकार के सम्मान से न सिर्फ सम्मानित कर सकते हैं बल्कि उनसे काफी कुछ सीख सकते हैं। कुंभ कथा शीर्षक से लगाई गई यह प्रदर्शनी लोगों को बहुत दिनों तक याद रहेगी। उस समय तक याद रहेगी जब तक कि एस के यादव अगली प्रदर्शनी में अपने चित्रों की नई प्रस्तुतियां नहीं कर देते । एस के यादव अत्यंत विनम्र हैं और उनकी फोटोग्राफी को देख कर यह लगता है कि इस कला में उनके अंतर्मन को भी परिष्कृत किया है और वह एक फोटोग्राफर के रूप में बहुत सक्षम और सुंदर हो गए हैं।  कला की यही एक भूमिका है कि वह सबसे पहले कलाकार को बदलती है । उसका परिष्कार करती है कलाकार को बेहतर बनाते हैं और फिर कलाकार को देख कर दुनिया बदलती है।

गौरतलब है कि इस कार्यक्रम के समापन अवसर पर इलाहाबाद की जानी मानी नाट्य संस्था समानांतर इंटिमेट थिएटर ने एस के यादव के सम्मान में कृष्णचंद्र के उपन्यास पर आधारित और अख्तर अली द्वारा रूपांतरित नाटक “एक गधे की आत्मकथा” की प्रस्तुति युवा नाट्य निर्देशक धीरज कुमार गुप्ता के निर्देशन में की जिसे नाट्य प्रेमियों ले बैठकर बड़े मन से देखा।  मैं व्यक्तिगत रूप से एस के यादव को बहुत बहुत बधाई देता हूं मेरे मित्र बहुत दिनों के बाद आए हैं पूरी तरह से दुरुस्त है औरसेहतमंद है यह बात मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक है।


अजामिल व्यास/ एक संजीदा इंसान, बेहतरीन फोटोग्राफिर, कवि मन और दिल में छिपा लेखक जनसरोकार से जुड़े मुद्दे पर बेबाक राय रखने से खुद को रोक नहीं पाता । 

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