डाॅ॰ संजय पंकज

खादी को गांधी जी के चेलों ने बर्बाद किया तो धर्म को गेरुआ धारण करनेवाले भेड़ियों ने। आश्रम की बेशर्मी ने भारतीय संस्कृति और मर्यादा को तार-तार किया तो डेरों के फेरों मे अनेक तथाकथित रंगे सियार महात्माओं के प्रपंच-जाल में फँसकर भोले-भाले लोग अपना सब कुछ गँवाने के बाद भी होश में नहीं आये। उनकी बेहोशी तब भी नहीं टूटी, जब उनके ढ़ोंग-ढकोसलों का पर्दाफाश हुआ। ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने का अनुशासन बताते-बताते आसाराम बापू ने जिस व्यभिचार का चमत्कार किया उसका उत्कर्ष सलाखों के पीछे ही होना था। बड़े-बड़ों की अकड़ और हेकड़ी, हथकड़ी, खाकी और जेलखानों के हवाले होते ही ढ़ीली हो जाती है। धनबल-जनबल-ज्ञानबल और शाखबल सब दलदल में चला जाता है, जब दाल-रोटी, खिचड़ी खानी पड़ती है और सेमेन्टेड चबूतरे और खस्ता हाल कम्बल में लिपटकर कोमल काया कुम्हला जाती है। एक बाबा आसाराम ही हो तो भी देश का कल्याण हो सकता था लेकिन यहाँ तो ऐसे बाबाओं की लम्बी सूची है।

समोसा, लड्डू खाने और खिलाने से कृपा आ जाती है, यह वर्तमान काल के वैभवशाली बाबाओं का गजब का नुस्खा है। उस बाबा का कुछ भी तो नहीं हुआ जो हाथ उठाकर अपने सजे-धजे शिष्यों को आज भी आशीर्वाद दे रहे हैं। उनका वही कृपा प्रसाद आज भी बँट रहा है। भारत ही ऐसा देश है जहाँ संत को महंत और फकीर को अमीर होते हुए आसानी से देखा जा सकता है। फुटपाथ से राजपथ तक की यात्रा करने वाले धर्म-धुरंधर विराट महात्माओं की कोई कमी नहीं है। नाबालिग लड़के-लड़कियों को बरगला कर उनसे यौनाचार ही नहीं किया उन महात्माओं ने, जो आज कानून के शिकंजे में कसे-कसमसा रहे हैं और जेल की कोठरी में प्राणायाम कर रहे हैं। उससे आगे बढ़कर अकूत सम्पत्ति अर्जित करते हुए अपने भुजबल से अनेकों के प्राण विसर्जित कर दिये। कोई ब्रह्मचारी तो कोई सदाचारी, कोई आसाराम तो कोई राम-रहीम, सबके अलग-अलग रूप-रूतबा और रूआब?

करोड़ों भक्तों को मोहकर छोड़ने का प्रवचन देने वाले आसाराम कल तक कह रहे थे कि हमारा बिछोह हमारे भक्त नहीं सह पायेंगे और वे जान दे देंगे। कुछ ने भावुकता में ऐसा प्रयास किया मगर विशाल भक्त समूह धीरे-धीरे अपने दरबे में सिमट गया और बाबा दंड बैठक लगाते हुए शोक में दुबले होते चले जा रहे हैं और नालायक शिष्यों पर माथा पीट रहे हैं। ईश्वर बने गुरुजी शुरू से ही गड़बड़ कर रहे थे मगर अंधी श्रद्धा में डूबे हुए शिष्यों को सबकुछ गुरुलीला और कृपा की तरह दिखलायी पड़ रहा था।

एक बाबा जो खूब चर्चा में आए- नित्यानंद स्वामी। उनकी कथा भी अपने किसी सहचरित्र बाबा से तनिक भी कमजोर नहीं है। न्यूज चैनल पर एक अभिनेत्री के साथ नित्यानंद स्वामी का वीडियो फुटेज उनके असंख्य भक्तों ने देखा तो वे बाबा से ज्ञान क्या लेते अपना भी ज्ञान भूल गये। मोहभंग हुआ। सिर धुनकर पश्चाताप किया-हाय! कैसा नालायक गुरु बनाया। हमें क्या मोक्ष मिलेगा, यह तो स्वयं क्षुधित है। देह पिपासु बाबा आत्म ज्ञान क्या देगा-वो क्या दिखाएँ राह जिन्हें खुद अपना पता नहीं।

इच्छाधारी नाग-नागिन की कथाएँ पढ़ी-सुनी गयी हैं। फिल्में भी बनाई गयीं। ढूंढ़ने पर भी कोई नाग-नागिन ऐसा नहीं मिला। जो मिला अगर उसने बढ़कर प्यार किया तो बस सीधे रामघाट जाना पड़ा। लेकिन 1997 में ही सेक्स रैकेट चलानेवाले एक बाबा जो इच्छाधारी संत के रूप में विख्यात थे, अपने कुख्यात कारनामों से तुरंत शोहरतनाम हो गये और यह महान अनुष्ठान वे उस चित्रकूट में कर रहे थे, जिसपर बाबा तुलसीदास ने लिखा-चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीड़। तुलसीदास प्रभु चंदन घिसे तिलक करे रघुवीर। इस इच्छाधारी संत को लगा होगा कि राम रघुवीर के चक्कर-वक्कर में बेकार फँसना है। इसीलिए उन्होंने लुक्कड़ों की जमात के लिए कुड़ियों का जुगाड़-पानी का धंधा शुरू कर दिया। धंधा अच्छा चल रहा था कि कहीं से काँटा फँस गया। गिरफ्तार किया गया। जेल गये। उनका खेल समाप्त हुआ। निकले तो सचमुच धंधा बदल के बाबागीरी में चले गये। पहले की दादागिरी तो पुलिस और कानून ने खत्म कर दी थी फिर भी-लागी लगन छूटै नहीं, जीभ चोंच जरि जाए।

रामशंकर तिवारी उर्फ परमानंद

तमिलनाडु के भोग के योग को साधकर परम आनन्द में डूबे स्वामी परमानंद महाराज की तो और भी प्रचंड रासलीला थी। मेडिकल जाँच में 13 महिलाओं के साथ रेप की पुष्टि हुई। उन्होंने पुरुषार्थ की जमकर साधना की थी, इसी से उन्हें शायद मोक्ष मिलना था। इस बाबा ने श्रीलंका के युवक की हत्या भी की थी- ऐसा भी आरोप है। बाबा ज्ञानचैतन्य ने भी किसी से कमजोर चमत्कार नहीं किया। 14 सालों से जेल में बंद है। तीन हत्याओं का आरोप है। धन्य है उनका ज्ञान और चैतन्यत्व। स्वामी सदाचारी तो अपने नाम के बिल्कुल विपरीत कामी-व्यभिचारी का दिव्य रूप प्रकट किया। वे तो बाजाब्ता वेश्यालय ही चलाते थे। शिष्यों का झुण्ड किसी भी बाबा से कम इनका भी नहीं रहा। समर्थकों ने उत्पात भी कम नहीं मचाया। कानून पर प्रभाव नहीं पड़ा।

किसी नेता-अभिनेता से कम भीड़ बाबाजी की गद्दी पर और दुकानदारी में नहीं लगती है। उनके चाहने वाले भी केवल गरीब-गुरबा-दलित और पिछड़े हुए लोग ही नहीं हैं, बल्कि अनेक बलों से सम्पन्न होकर उनका रसूख इतना बढ़ जाता है कि राजनीति और कानून पर भी वे भारी पर जाते हैं। इसी का परिणाम है कि ये बाबा लोग अनाप-शनाप काम करते हुए जैसे-तैसे अकूत सम्पत्ति के मालिक हो जाते हैं। वे कोई ऐसा कुकर्म नहीं छोड़ते जिससे किसी सभ्रांत नागरिक को शर्म आती है। आखिरकार हमारी सरकार और कानून-व्यवस्था कब समझेगी और संभलेगी ? क्या उन्हें कल तक के महादरिद्र बाबा का अचानक अरबपति बन जाना, पता नहीं चलता है।

सुविधाभोगी इन बाबाओं को भगवान जाने जब जेल में जाना पड़ता है तो उन्हें वहाँ कैसा लगता है ? पंजाब और हरियाणा में डेरा का कम लफड़ा नहीं उजागर हुआ। बाबा रामरहीम भी कई वर्षों से जिस तरह से चर्चा में आते रहे वह बहुत पहले ही विचारणीय था। उनके चरित्र का जब पूरा पर्दाफाश हुआ तो वे केवल एक फरेबी बाबा ही नहीं, बड़े अपराधी भी साबित हुए। सच्चे गुरू के नाम पर कच्चे लंगोटवाले बाबा भी समय पर अपना पौरुष अबलाओं पर और अपनी ताकत कमजोरों पर दिखाते रहते हैं।

भेड़ियाधसान भीड़ का अंश होने से विवेक के साथ बचने की जरूरत है और खुली आँखों से बाबा के चरित्र को देखते हुए धर्म को समझना अत्यावश्यक है। भगवान बचाये इन बाबाओं से। बाबा कबीर ने तो बहुत पहले ही लिख दिया है-‘‘मन न रंगाये रंगाये जोगी कपड़ा/ आसन छार मंदिर पूजन न लागे पथरा।/दढ़िया बढ़ौले जोगी बन गइले बकरा/ज्ञान बांच के हो गइले लबरा।’’  इन आचरणहीन, ज्ञानशून्य और प्रपंची महात्माओं, महंथों, संतों, पीर-फकीरों से बचकर निकलते हुए संवेदना के साथ अपने मनुष्य को जिंदा रखना है और समाज-देश के काम आते हुए आने वाली पीढ़ी को सही मार्गनिर्देशित करना है।


संजय पंकज। बदलाव के अप्रैल 2018 के अतिथि संपादक। जाने – माने साहित्यकार , कवि और लेखक।  स्नातकोत्तर हिन्दी, पीएचडी। मंजर-मंजर आग लगी है , मां है शब्दातीत , यवनिका उठने तक, यहां तो सब बंजारे, सोच सकते हो  प्रकाशित पुस्तकें। निराला निकेतन की पत्रिका बेला के सम्पादक हैं। प्रेमसागर, उजास , अखिल भारतीय साहित्य परिषद, नव संचेतन, संस्कृति मंच , साहित्यिक अंजुमन, हिन्दी-उर्दू भाषायी एकता मंच जैसी संस्थाओं, संगठनों से अभिन्न रूप से जुड़े रहे हैं। हिन्दी फिल्म ‘भूमि’,’खड़ी बोली का चाणक्य ‘ तथा टीवी धारावाहिक ‘सांझ के हम सफर’ में  बेजोड़ अभिनय। आपसे मोबाइल नंबर 09973977511  पर सम्पर्क कर सकते हैं। 

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