संविधान सभा से जुड़ी कुछ जरूरी बातें समझना जरूरी है

संविधान सभा से जुड़ी कुछ जरूरी बातें समझना जरूरी है

पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से साभार

पिछले दिनों ये इच्छा हुई कि देश का संविधान कैसे बना और उसके बनते वक़्त क्या-क्या बहसें हुई, इस पर कुछ पढूं और उसमें जो अच्छा लगता है उसे साझा करता चलूं। यह संविधान का महीना है, 26 जनवरी आने वाला है और देश में संविधान की बहस तेज भी है। मगर दुःखद तथ्य यह है कि हम अपने ही संविधान के बारे में बहुत कम जानते हैं। कल एक पोस्ट संविधान सभा के संकल्प के तथ्यों को पोस्ट किया था। आज से इसके बनने की कहानी पढ़ना और साथ साथ लिखना शुरू है। यह पहली कड़ी है। उम्मीद है कि आप पढ़ें और जो गलत लगेगा उसे करेक्ट भी करेंगे।)

तो जब मैंने भारत के संविधान के बनने की कहानी को पढ़ना शुरू किया तो पहली ही पंक्ति में ठिठक गया। वहां उस व्यक्ति का नाम था, जिसने सबसे पहले संविधान सभा गठित करने की मांग की थी। अगर आप पहले से जानते होंगे या तस्वीर देखकर पहचान गए होंगे तो कोई बात नहीं। पर अगर आप नहीं जानते हैं तो जान लीजिये, वे मानवेन्द्र नाथ रॉय (एम एन राय) थे। जो भारत में कम्युनिस्ट विचारधारा पर आधारित राजनीति के पुरोधा थे, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के संस्थापक थे। तथ्य कुछ यूं हैं कि 1934 में ही एमएन रॉय ने यह मांग की थी कि भारत का अपना संविधान होना चाहिये, इसके लिये जल्द से जल्द संविधान सभा की स्थापना की जाए। इससे सत्ता हस्तांतरण में भी सुविधा होगी। बाद में महज एक साल बाद कांग्रेस पार्टी ने अपनी मांग में इस बात को आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया। 1940 में ब्रिटिश सरकार ने इस मांग को मान भी लिया।

यह जानकारी मेरे लिये भी विस्मयकारी थी, क्योंकि मैं भी यह मानता था कि आजादी के आंदोलन के वक़्त भी भारत के वामपंथी कम्युनिस्ट इंटरनॅशनल से संचालित होते थे। आज भी देश के किसी कोने में कम्युनिस्ट पार्टी के दफ्तर में जाईये तो केवल मार्क्स, लेनिन और स्तालिन की तस्वीरें दिखेंगी। कोई स्थानीय भारतीय नेता नहीं दिखेगा। मगर एमएन रॉय ने न सिर्फ सबसे पहले देश के लिए संविधान सभा की मांग की, बल्कि उसके लिए पूरी पैरवी भी की। 1944 में उन्होंने अपनी तरफ से भारतीय संविधान का एक ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया था। यह ड्राफ्ट कांस्टीट्यूइंट असेम्बली की साइट पर उपलब्ध है, लिंक कमेंट बॉक्स में दे रहा हूँ।

उस ड्राफ्ट को पूरा पढ़िये, अधिकार से लेकर निर्देशक तत्व, राज्य और देश के अधिकार समेत कई नियम उसमें शामिल हैं। उसके दो साल बाद सम्भवतः गांधी ने भी अपना संविधान का ड्राफ्ट तैयार किया था।

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