अरुण प्रकाश

यूपी चुनाव से पहले आरक्षण का जिन्न एक बार फिर ‘RSS की बोतल’ बाहर आ चुका है । बस फर्क इतना है कि बिहार चुनाव के दौरान संघ प्रमुख ने बयान देकर बीजेपी की जीत की उम्मीदों को पलीता लगाया था और अब मनमोहन वैद्य सामने आए हैं। हालांकि जयपुर लिटरेचर फेस्ट में मनमोहन वैद्य ने अपने मन की बात कही और आरक्षण को खत्म करने की वकालत की जिससे इस बात को समझा जा सकता है कि आखिर संघ समाज के निचले वर्गों को समान अधिकार देने का कितना पक्षधर है । यूपी चुनाव से ठीक पहले मनमोहन वैद्य का ये बयान बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है लिहाजा मौके की नजाकत को देखते हुए बीजेपी वैद्य की ओर से मिली चोट पर मरहम लगाने में जुट गया और बयान देने के कुछ घंटे बाद ही मनमोहन वैद्य को भी सफाई देने सामने आना पड़ा और एक बार फिर मीडिया पर बयान को गलत तरीके से परोसने का आरोप मढ़कर अपने आरक्षण विरोधी सोच पर एक बार फिर पर्दा डालने की कोशिश की, लेकिन लालू यादव की टिप्पणी से साफ हो गया कि बिहार चुनाव की तरह यूपी में आरक्षण का मुद्दा बीजेपी का पीछे जरूर करेगा । चूकी यूपी में ओबीसी और एससी एसटी का बहुत बड़ा तबका है जो आरक्षण से प्रभावित है लिहाजा अगर ये यूपी की जनता में ये डर बैठ गया कि बीजेपी आई तो आरक्षण पर खतरा हो सकता है तो जाहिर है जिस वर्ग को मोदी लुभाने के लिए दिन रात जूटे हैं वो हाथ से फिसल जाएगा । खैर मनमोहन वैद्य के बयान पर पेश है कुछ फेसबुक टिप्पणियां ।

वैद्य का बयान RSS की ‘राष्टृवादी विचारधारा’ और ‘हिन्दुत्वा दर्शन’ का प्रतिनिधित्व है- उर्मिलेश उर्मिल

राजनीतिक रूप से इतने ‘प्रदूषित परिदृश्य’ में भी RSS के बडे़ नेता ज्यादा ‘शुद्ध’ हैं। भागवत जी और वैद्य जी सामाजिक-राजनीतिक मसलों पर दिल खोलकर बोलते हैं। असल में ‘मन की बात’ तो यही लोग करते हैं। अभी वैद्य जी ने ‘आरक्षण बनाम समान अवसर’ पर जो बयान दिया, वह RSS की ‘राष्टृवादी विचारधारा’ और ‘हिन्दुत्वा दर्शन’ का प्रतिनिधित्व करता है। वैद्य जी जैसे लोग ऐसे मुद्दों पर हमेशा सच बोलते हैं, BJP वालों की तरह जनता को बेवकूफ बनाने के लिए संघ की विचारधारा को ‘अशुद्ध’ और ‘प्रदूषित’ करके नहीं पेश करते! वैद्य जी, आगे भी इसी तरह ‘सच्ची बातें’ कहते रहिये!

अब तेल देखिए और तेल की धार देखिए- अजीत अंजुम

चुनाव से पहले आरएसएस प्रवक्ता का बड़ा बयान – ख़त्म होना चाहिए आरक्षण । ऐसा ही बयान बिहार चुनाव के पहले मोहन भागवत ने दिया था । विरोधी दलों इस बयान पर जब बीजेपी को घेरना शुरु किया तो पीएम मोदी और अमित शाह समेत सभी बीजेपी नेता पूरे प्रचार के दौरान सफ़ाई देते रह गए लेकिन बीजेपी को जो नुक़सान होना था, हो गया । अब यूपी -पंजाब के अहम चुनाव से पहले वही काम मनमोहन वैद्य ने किया ..अब तेल देखिए और तेल की धार देखिए।

 आरएसएस चाहे तो अपने यहां ब्राह्मणों का आरक्षण जारी रखे- नवीन कुमार

आरक्षण कोई एहसान नहीं है। यह सैकड़ों साल से अवसरों को छीने जाते रहने की अमानवीयता का बहुत मामूली पश्चाताप है। इस दमन का आधार जातीय रहा है, आर्थिक नहीं। अफ़सोस ये अब भी जारी है। तो आरक्षण भी जातीय ही होगा। आरएसएस के चितपावन ब्राह्मणों की लठैती नहीं चलेगी। बीजेपी इसको संभाल नहीं पायेगी। आरएसएस चाहे तो अपने यहां ब्राह्मणों का आरक्षण जारी रखे।

आरक्षण RSS जैसे जातिवादी संगठन की खैरात नहीं- लालू प्रसाद यादव

मोदी जी आपके RSS प्रवक्ता आरक्षण पर फिर अंट-शंट बके है। बिहार में रगड़-रगड़ के धोया, शायद कुछ धुलाई बाकी रह गई थी जो अब यूपी जमकर करेगा। आरक्षण संविधान प्रदत्त अधिकार है। RSS जैसे जातिवादी संगठन की खैरात नहीं। आरक्षण छिनने की बात करने वालों को औकात में लाना कमेरे वर्गों को आता है। RSS पहले अपने घर में लागू 100फीसदी आरक्षण की समीक्षा करें। कोई गैर-स्वर्ण पिछड़ा/दलित व महिला आजतक संघ प्रमुख क्यों नही बने है? बात करते है। लालू जिन्दा है और जातिवादियों को खेदड़ना बख़ूबी आता है। उत्तरप्रदेश की जनता समझदार है। वहाँ का दलित, पिछड़ा और अकलियत एकजुट होकर बीजेपी को दौड़ा-दौड़ा कर नागपुर भेज देगा।

खैर आरएसएस ने बैठे-बिठाये विरोधियों के हाथ एक मुद्दा थमा दिया । वैसे भी बीजेपी पर पहले से भी मनुवादी सोच की पार्टी माना जाता रहा है । हालांकि पिछले ढाई बरस में मोदी जी ने बीजेपी को उसकी परंपरावादी सोच से उबारने में काफी हद तक कारगर भी साबित हुए । 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हर वर्ग का साथ मिला और बीजेपी भारी बहुमत से सत्ता में आई उसके बावजूद मोदी की कैबिनेट में एक ही समुदाय के लोगों को तरजीह देने का आरोप लगता रहा फिर भी देश की जनता का मोदी जी पर भरोसा कम नहीं हुआ ऐसे में अगर इसी तरह आरएसएस आरक्षण की आग को कुरेदता रहेगा तो बिहार की तरह यूपी में भी बीजेपी को जलने से कोई रोक नहीं पाएगा ।arun profile1


अरुण प्रकाश। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय।