बदलाव प्रतिनिधि

नवोदय विद्यालय एल्युमिनी एसोसिएशन बिहार की ओर से पूर्णिया में 8 जुलाई को फिल्म  “लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट ” का प्रीमियर रखा गया है।  इस फिल्म में मुख्य किरदार रवि भूषण भारतीय का है, जो पूर्णिया नवोदय के 1991 बैच के छात्र हैं।  नवोदय में पढ़ाई लिखाई के दौरान ही रवि भूषण की नाटकों में अभिरुचि पैदा हुई, जिसे उन्होंने सजाया-संवारा और पेशे के तौर पर अपनाया। उन्होंने पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से अभिनय में डिप्लोमा भी किया है। इन दिनों मुंबई में हैं और कई फिल्मों में शानदार अभिनय की बदौलत अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।

फिल्म लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट का दृश्य

लेखक निर्देशक पवन कुमार श्रीवास्तव की जल्द ही रिलीज़ होने वाली फ़िल्म “लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट ” के ज़रिए समाज के उपेक्षित वर्ग की पीड़ा को अभिव्यक्त करने की कोशिश की गई है। और क्या खूब कोशिश है जो एक निष्कासित दलित परिवार के दमन, संघर्ष और जिजीविषा को बेहद तरतीबी से, शॉट बाई शॉट, सामने लाती है। कहानी एक सवर्ण-बहुल गांव के बाहर रह रहे अधेड़ उम्र के दलित की है, जो अपनी पत्नि को ठाकुर को सौंप देने की बजाय गांव से निष्कासन चुनता है। संघर्षों से हार नहीं मानता और अपने बेटे को पढ़ाकर उसी गांव के स्कूल में गणित का अध्यापक बनाता है। लेकिन एक दिन उसके बेटे को पुलिस पकड़कर ले जाती है क्योंकि वो ब्लैक बोर्ड पर ‘ओम्’ नहीं लिखता। दलित द्वारा अपने बेटे को जेल से छुड़ाने के लिए पैसे जुटाने की कोशिशों के सफ़र पर ले जाती है यह फिल्म। इसी सफ़र के दौरान दर्शक उन सारी मुश्किलों, सारे संघर्षों से रूबरू होते हैं जो इस परिवार ने झेले हैं।


रवि भूषण की फिल्म लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट का रिव्यू-एक

रवि की फिल्म पर किसलय कुमार की टिप्पणी- दो

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