अरुण यादव

अन्ना एक बार फिर रामलीला मैदान में हैं । पिछले कुछ दिनों से न्यूज़ रूम में बैठकर कैमरे की नज़र से अन्ना आंदोलन का विश्लेषण करने में जुटा था, मसलन इस बार अन्ना आंदोलन में भीड़ नहीं, आखिर भीड़ क्यों नहीं है, क्या लोगों का अन्ना पर भरोसा नहीं रहा। 26 मार्च की सुबह के करीब सवा 10 बजे रहे होंगे, हम रामलीला मैदान पहुंचे। कोई हाथ में तिरंगा लिए अन्ना के समर्थन मे नारे लगा रहा था तो कोई बैठकर कुछ बातें करता दिखा, कुछ लोग पंडाल में लेटे हुए भी दिखे। ये कि ये देश की आम जनता थी, जमीन से जुड़े लोग, शूट-बूट और कोट-पैंट वाले नहीं बल्कि धोती-कुर्ता और गमछाधारी। हर किसी के चेहरे पर अन्ना आंदोलन से उम्मीद की आस साफ नजर आ रही थी। लोगों के चेहरे पर झुर्रिया पड़ी हुई हैं, लेकिन उन्हें अपने शरीर की नहीं अपने भविष्य की फिक्र यहां खींच लाई है ।

यूपी, महाराष्ट्र, पंजाब समेत कई सूबों के किसान और मजदूर अन्ना के समर्थन में 23 मार्च से रामलीला मैदान में डेरा डाले हुए हैं। अन्ना किसानों के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं। लखनऊ से आईं सपना राज त्यागी जिनकी अगुवाई में करीब सवा सौ महिलाओं की टोली अपना डेरा डाल हुए है, उनका कहना है कि वो लोग तब तक यहां से नहीं हिलेंगे जब तक अन्ना अनशन पर रहेंगे। सपना राज त्यागी के साथ आई ज्यादातर महिलाएं मजदूरी करके अपना पेट पालती हैं। उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी हैं, कुछ 2 साल के तो कुछ उससे भी कम। शायद इन्हीं बच्चों के भविष्य की चिंता इन्हें यहां खींच लाई है।

पंडाल के एक किनारे पर एक शख्स मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट लगाकर बैठा दिखा, नाम है मोहित सैनी। जो जयपुर से आए हुए हैं और 24 मार्च से रामलीला मैदान में डटे हुए हैं। जब उनसे मैंने पूछा कि आपके साथ और कौन-कौन है, तो जवाब मिला- मैं अकेला ही आया हूं। क्या मैं अकेला हूं तो मेरी आवाज नहीं सुनी जाएगी। मोहित सैनी किसान नहीं हैं, फिर भी अन्ना के साथ हैं।

थोड़ा और आगे बढ़ने पर बुजुर्गों और युवाओं की एक टोली नजर आई। पूछने पर पता चला कि ये लोग रतलाम से आए हैं। रतलाम से इनकी टोली के एक सदस्य महादेव पाटीदार से बात करने पर मालूम हुआ कि ये लोग देश की एक चिट-फंड कंपनी के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। लिहाजा जब अन्ना ने भ्रष्टाचार और किसानों के मुद्दे पर रामलीला आने का आह्वान किया तो ये लोग यहां खिंचे चले आए। ये सभी ऑल इंडिया सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन से जुड़े हैं। इनका दावा है कि अगले एक से दो दिन में इनके संगठन के करीब 5 हजार से ज्यादा लोग रामलीला मैदान आने वाले हैं।

रामलीला मैदान में अलग-अलग राज्यों से आए लोगों के बैनर-पोस्टर लगे हैं । यूपी से लेकर गुजरात तक और पंजाब से लेकर हरियाणा तक तमाम प्रदेशों से किसान और मजदूर आपको रामलीला ग्राउंड में नजर आ जाएंगे। पिछले 23 तारीख से यहीं सोना है यहीं खाना-पीना है। इनके खाने के लिए संगरुर से किसानों का एक दल लंगर चला रहा है, जहां इनको पेट भरने के लिए दो वक्त की रोटी मिल जा रही है और पीने के लिए पानी। रसोइयों की टोली अन्ना के इस आंदोलन में अपने इसी योगदान से खुश है।

इन सबके बीच पंडाल के चारों तरफ सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम। सुरक्षाकर्मियों ॉकी संख्या इतनी ज्यादा है कि एक पल पंडाल से हटकर आपकी नज़र इन्हीं पर टिक जाएंगी। खैर कुछ लोग इस बात पर जरूर खुश हो रहे होंगे कि अन्ना का पंडाल अभी खाली है, लेकिन अन्ना समर्थक इस बात से खुश हैं कि पंडाल आधा भरा है और यही सोच कर इनकी संर्घष की इच्छा शक्ति बढ़ जाती है।

हम जैसे एसी वाले लोग हर रोज अन्नदाता की उपाधि से किसानों को नवाजते हैं लेकिन जब वही अन्नदाता आज हमारे दरवाजे पर आया है तो उसका अनादर कर रहे हैं। अन्नदाता को करीब से देखने और समझने की कोशिश तो होनी चाहिए। वो यूं ही मार्च की दुपहरी में खेत छोड़ रामलीला मैदान में तप नहीं कर रहा। उसे कुछ तो शिकवा है इसके मुल्क के हुक्मरानों से, जिसे दूर करने की सच्ची और ईमानदार कोशिश होनी चाहिए।


arun profile1अरुण यादव। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय।

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