राखी के मौके पर देश को एक बहना ने सबसे नायाब गिफ़्ट दिया है। ये हम नहीं कह रहे, ऐसे ही न जाने कितने पोस्ट सोशल मीडिया पर हैं जो साक्षी मलिक की जीत का जश्न मना रहे हैं। कुछ साथियों को मेडल की होड़ पसंद नहीं, वो खेल भावना की बात कर रहे हैं। ऐसी ही कुछ टिप्पणियां फेसबुक से बदलाव के पाठकों के लिए।

साक्षी को 130 करोड़ हिंदुस्तानियों का सैल्यूट

sakshi-1जो हारी बाजी जीत जाता है….वही सिकन्दर कहलाता है….. भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक ने रियो ओलिम्पिक गेम्स में कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में भारत का खाता खोला है…साक्षी ने 58 किलो भार वर्ग में अपनी प्रतिद्वन्दी पहलवान को पटखनी देकर देश का नाम गौरवान्वित किया है…. रियो रवाना होने से पहले साक्षी मलिक से मेरी मुलाकात लखनऊ स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ट्रेनिंग सेंटर में हुई थी….उस दिन साक्षी ने कहा था, सर अपनी पूरी कोशिश होगी कि मेडल जीतकर वापस लौटूं… साक्षी मलिक से जब हमारी बात हो रही थी तो उनके कोच पूर्व ओलंपियन कुलदीप सिंह भी थे…. साक्षी मलिक पदक जीतने के बाद अपने कोच के कंधे पर चढ़कर जब तिरंगा लहरा रही थी तो इस देश के 130 करोड़ लोग उन्हें सैल्यूट कर रहे थे….जय हो….

radheji profile-1


राधे कृष्ण पिछले दो दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। कई बड़े मीडिया संस्थानों में नौकरी के बाद इन दिनों स्वतंत्र लेखन में मशगूल। हाल ही में आपकी नई पुस्तक संघर्ष के प्रयोग प्रकाशित हुई है।


sakshi-3हर बेटी साक्षी हो सकती है

साक्षी मलिक शुक्रिया, एक अरब पच्चीस करोड़ भारतीयों के अभिमान को बरकरार रखने के लिए। सेक्स रेशियो की समस्या से जूझ रहे हरियाणा में इस जीत का दूरगामी असर होगा। हर बेटी साक्षी हो सकती है। उसे गर्भ में ना मारें, उसे दुनिया में आने दें। उसके अरमानों को परवाज़ चढ़ने दें।


panna lal profile

पन्ना लाल। पिछले एक दशक से ज़्यादा वक़्त से पत्रकारिता में सक्रिय। इन दिनों न्यूज नेशन में बतौर प्रोड्यूसर कार्यरत।


सावन के आख़िरी दिन पदक का सूखा ख़त्म

sakshi-2जब साक्षी अखाड़े में उतरी तो हम सब आश्वस्त थे। भरोसा था कि वे कुछ कर गुजरेंगी। और हो भी क्यों न डेढ़ घंटे पहले उन्होंने मंगोलिया की पहलवान को 12-3 से हराया था। लेकिन ये क्या, साक्षी के चेहरे पर कुछ थकान दिख रही थी, और नीली वर्दी वाली पहलवान ने ताकत के बजाय चतुराई का सहारा लिया। एक ही दांव से साक्षी को दो-दो बार मात दी। देखते-देखते स्कोर 5-0। लगा कि हार बस एक औपचारिकता रह गई है। डिजिटल घड़ी में धड़ाधड़ उलटी गिनती चालू। कोई डेढ़ मिनट बचा था, तब अचानक साक्षी ने तूफान से कश्ती निकाली। स्कोर हो गया 5-4।

फिर आया वह आखिरी मिनट। साक्षी बिजली की फुर्ती से चढ़ बैठीं। प्वाइंट बरसने लगे। विरोधी का मोर्चा खुल गया। सब साक्षी के पक्ष में होता चला गया। वह आठ प्वाइंट तक जा पहुंचीं। दफ्तर में देर रात तालियों की जोरदार आवाज गूंज उठी, जबकि उन्हें बजाने के लिए बहुत कम हाथ ही फ्लोर पर थे। सावन के आखिरी दिन पदक का सूखा खत्म हुआ। उम्मीदें और भी हैं लेकिन कोच के कंधों पर चढक़र तिरंगा फहराती रोती-मुसकुराती साक्षी तुम उसी तरह आंखों में बसी रहोगी जैसे कभी लिएंडर पेस ने बरसों-बरस का सूखा खत्म कर इस देश को कांसा दिलाया था।


piyush baweleपीयुष बवेले। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र। संप्रति इंडिया टुडे में वरिष्ठ संपादकीय सहयोगी।