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प्रियंका यादव

यूपी में जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है सियासी पारा चढ़ रहा है । कोई विकास रथ लेकर निकला है तो कोई परिवर्तन रथ पर सवार हो चुका है । हर किसी की नज़र मिशन 2017 पर टिकी है । कहते हैं कि यूपी में हार या जीत काफी हद तक पूर्वांचल से तय होती है। यही वजह है कि 2014 में मुलायम  को मैनपुरी और मोदी को अहमदाबाद छोड़ पूर्वांचल की शरण में आना पड़ा। ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी है कि समाजवादी संग्राम का पूर्वांचल पर क्या असर पड़ा है। क्या पूर्वांचल अखिलेश के साथ खड़ा होगा या फिर मोदी का जादू बरकरार रहेगा । इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए बदलाव के लिए प्रियंका ने बात की पूर्वांचल में समाजवादी सियासत से लंबे वक्त से जुड़े रहे नेता राजित यादव से।

राजित प्रसाद यादव, पूर्व विधायक

बदलाव समाजवादी पार्टी में पिछले दिनों मचे घमासान का पूर्वांचल के वोटरों पर क्या असर पड़ सकता है ?

राजित यादव समाजवादी पार्टी में आपसी खींचतान से जनता परेशान जरूर रही। एक पल के लिए लग रहा था कि आखिर ये सब क्या हो रहा है, लेकिन जब अंधियारा छटा तो एक नया अखिलेश निखरकर सबके सामने आया । जनता जिस रूप में अखिलेश को देखना चाहती थी बिल्कुल वैसा ही अखिलेश। यानी कल तक जो अखिलेश सिर्फ प्रदेश के मुख्यमंत्री भर थे अब वो जननेता की दहलीज पर कदम बढ़ा चुके हैं।

बदलाव- पिछले दिनों समाजवादी पार्टी की रजत जयंती समारोह में चाचा-भतीजे मंच पर साथ-साथ रहे लेकिन क्या दिल मिले ?

राजित यादव जैसा कि हर कोई जानता है कि अखिलेश हमेशा बड़ों को सम्मान देने के साथ ही छोटों को भी पूरा आदर देने वाले नेता हैं। वो किसी के बेटे तो किसी के भतीजे हैं, लेकिन इन सबसे ऊपर वो प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । ऐसे में बड़ों का सम्मान जनता के हितों से बड़ा नहीं हो सकता । शायद यही वजह रही कि वो परिवार वालों के खिलाफ भी कड़े कदम उठाने में नहीं हिचकिचाए। परिवार वालों से दिल मिला या नहीं, ये मैं नहीं जानता लेकिन जनता से दिल मिल चुका है, ये पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं । अखिलेश के ऊपर एक शायर की रचना बखूबी फिट बैठती है- फानूष बनकर जिसकी हिफाजत हवा करे, वो शमा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे ।

बदलाव- अखिलेश के कामकाज के तरीके को आप किस रूप में देखते हैं ?

राजित यादव अखिलेश प्रदेश में एक अच्छी व्यवस्था दे सकते हैं, शर्त बस इतनी है कि कोई उनके काम में रुकावट न डाले।

बदलाव- अखिलेश पर उनके चाचा शिवपाल आरोप लगाते हैं कि वो चापलूसों से घिरे हैं, इसमें कितना दम है ?

राजित यादव देखिए अखिलेश एक युवा मुख्यमंत्री है, अनुभव की कमी हो सकती है। उनके आस-पास उनकी सादगी का बेजा इस्तेमाल करने वाले भी होंगे इसमें कोई संदेह नहीं। ऐसे लोगों को अखिलेशजी को पहचानना होगा। इन सबके बावजूद मैं यहीं कहूंगा कि अखिलेश में एक जननेता बनने के गुण हैं। अखिलेश की नीति अच्छी है और नीयत साफ है। पिछले दिनों पार्टी में जो कुछ हुआ उससे ये साफ हो गया कि जनता के प्रति वो सौ फीसदी वफादार हैं। उन्होंने बड़े ही मर्यादित तरीके से परिवार के बड़ों का सामना किया और फिर कुशल राजनेता की तरह जनता के प्रति अपनी वफादारी का परिचय भी दिया, जो काबिले तारीफ है।

बदलाव- 2012 से अब तक क्या कभी अखिलेश ने आप जैसे पुराने नेताओं की खोज-खबर ली या फिर आप जैसे अनुभवी राजनेताओं ने कभी अखिलेश से मिलकर उन्हें चाटुकारों से सावधान रहने की सलाह देने की कोशिश की ?

राजित यादव को सम्मानित करते CM अखिलेश
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CM अखिलेश यादव के साथ राजित और उनकी युवा टीम

राजित यादव अखिलेशजी प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। वो सूबे की जनता के लिए जनकल्याणकारी फैसले ले रहे हैं। हम सभी के लिए यही काफी है। रही बात मुख्यमंत्री से मुलाकात की तो पिछले महीने मेरी मुख्यमंत्रीजी से काफी देर तक मुलाकात हुई और बात भी हुई। युवा जोश और पुराने नेताओं के अनुभवों के बीच तालमेल को लेकर काफी चर्चा हुई। उस दौरान पार्टी में घमासान चल रहा था लिहाजा मैंने उनसे ये भी कहा कि आप संकटों से घबराएं नहीं, हालात चाहे जो भी हों आप जनहित को ध्यान में रखकर फैसले कीजिए, जनता आपके साथ रहेगी।

बदलाव- आपने जनसरोकार की बात की, लेकिन क्या आज जनसरोकार की सियासत बची है ?

राजित यादव आजकल की राजनीति सेवा भाव की जगह व्यवसाय बन गई है। जन कल्याण और लोगों की तरक्की के बदले नेताओं को अपने उत्थान की चिंता ज्यादा रहती है। मैंने तो उस दौर में राजनीति शुरू की जब नेताओं में जनता के लिए जीने की ललक रहती थी। शायद यही वजह रही कि सैदपुर की जनता ने मुझे 1985 और 1989 में लगातार दो बार विधानसभा भेजा, लेकिन उसके बाद आज तक कोई भी लगातार दो बार सैदपुर से चुनाव नहीं जीत सका ।

बदलाव- करीब चार दशक से पूर्वांचल की सियासत पर आपकी पैनी नजर है। ऐसे में 2017 में क्या पूर्वांचल लोकसभा की तरह बीजेपी के साथ खड़ा रहने वाला है या फिर समाजवादी पार्टी 2012 की तरह एक बार फिर पूर्वांचल पर काबिज होगी ?

akhilesh-3राजित यादव देखिए 2014 में जो कुछ हुआ वो अप्रत्याशित था। लोगों के मन में मोदीजी को लेकर काफी उम्मीदें जगी थीं, जिसे मोदी के लोक-लुभावन वादों के अतिरेक ने और बढ़ा दिया। हालांकि पीएम बनने से पहले जो ख्वाब मोदीजी ने दिखाये थे वो अब टूटने लगे हैं। यही नहीं अब तो मर्यादाओं का उल्लंघन भी होने लगा है। ऐसे में अब पूर्वांचल की जनता बीजेपी के बहकावे में आनेवाली नहीं है। सच तो ये है कि पूर्वांचल ही नहीं पूरे प्रदेश की जनता अखिलेश को चाहने लगी है ?

बदलाव- तो क्या अखिलेश समाजवादी पार्टी के पुस्तैनी वोट बैंक के अलावा भी वोट बटोर पाने में सफल होंगे ?

राजित यादव सच तो ये है कि आज हर वर्ग के दिल में अखिलेश अपनी पैठ बना चुके हैं, लेकिन वो वोट में कितना तब्दील हो पाता है ये काफी हद तक अखिलेश की मेहनत पर निर्भर करता है ।

बदलाव- कहीं इसी वजह से समाजवादी पार्टी महागठबंधन की जुगत में तो नहीं जुटी है ?

राजित यादव चाहे गठबंधन बने या फिर महागठबंधन नेता अखिलेश ही रहेंगे । आज प्रदेश बदलाव की राह पर निकल चुका है और जनता बदलाव के रास्ते में आने वाली हर रुकावट को मिटा देगी । दूसरे दल भी इस बात को बखूबी जानते हैं कि अखिलेश का कोई विकल्प नहीं ।

             राजित यादव का संक्षिप्त परिचयrajit-prasadyadav-parichay

akhilesh-4बदलाव- तो क्या अखिलेश लोकप्रियता में मुलायम को पीछे छोड़े देंगे ?

राजित यादव मुलायम सिंह से अखिलेश की तुलना करना ठीक नहीं। मुलायम सिंह संघर्ष से नेता बने हैं और अखिलेश अपनी जनप्रिय नीतियों से । इसलिए मुलायम सिंह की तरह अखिलेश को भी अब जनता ने अपना नेता मान लिया है और जिसे जनता नेता मान लेती है, उसे जननेता बनने से कोई रोक नहीं सकता ।

बदलाव 10 साल बाद अखिलेश को आप कहां देखते हैं ?

राजित यादव अखिलेश के काम करने का तरीका और जनकल्याण के लिए उनकी वचनबद्धता देखने के बाद इसमें कोई संदेह नहीं कि एक दिन वो पूरे देश के सर्वमान्य नेता बनेंगे। हालांकि इसके लिए सही मार्गदर्शन और जननेताओं से जुड़े रहने की उन्हें जरूरत पड़ेगी। स्वार्थी नेताओं से दूरी बनानी होगी और पार्टी के अनुभवी नेताओं के साथ वैचारिक आदान-प्रदान का सिलसिला बनाए रखना होगा । ऐसे नेताओं के साथ जो स्वार्थ की राजनीति के बजाय अच्छी नियत से समाज की सेवा में जुटे हैं ।

बदलाव- बदलाव से बात करने के लिए शुक्रिया।


प्रियंका यादव,  तन दिल्ली में भले हो लेकिन मन तो गांव ही बसता है । जब कभी घूमने का मौका मिलता है तो गांव पहली पसंद होती है।

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