पुष्यमित्र

बिहार में महागठबंधन की ओर से सीट शेयरिंग और पहले चरण के उम्मीदवारों की घोषणा हो गयी। इसमें बताया गया कि नवादा से विभा देवी चुनाव लड़ेंगी, वे एनडीए की वीणा सिंह को टक्कर देंगी। खबर यह भी है कि नीलम देवी मुंगेर से चुनाव लड़ेंगी और जदयू के ललन सिंह को मुकाबले में चित करने का प्रयास करेंगी। रंजीता के सुपौल से कांग्रेस के उम्मीदवार होने की संभावना है। हिना सीवान से मैदान में उतरेंगी। लवली भी कहीं न कहीं से टिकट के लिए प्रयासरत हैं और पहले भी सांसद रह चुकी हैं। लेसी सिंह और बीमा भारती के भी इस चुनावी मैंदान में उतरने की चर्चा थी, मगर अब उन पर विराम लग गया है। ये दोनों पहले भी मंत्री रह चुकी हैं।मगर ये सभी महिलाएं हैं कौन, और राजनीति में इनका अवदान क्या है?

पुष्यमित्र का चुनावी अड्डा पार्ट-2

जैसे ही नवादा से महागठबंधन के लिए विभा देवी के नाम की घोषणा हुई, सोशल मीडिया में भर्त्सना के पोस्ट की भरमार होने लगी। वजह वाजिब थी, क्योंकि विभा देवी की पहचान सिर्फ इतनी है कि वे राजद नेता राजवल्लभ यादव की पत्नी हैं और राजवल्लभ यादव रेप के अपराध की सजा पा चुके हैं। अब संविधान चूकि उनके चुनाव लड़ने को प्रतिबंधित करता है, सो पार्टी ने उनकी पत्नी को टिकट दे दिया। इस तरह देखा जाये तो राजद ने रेप की सजा पा चुके राजवल्लभ को ही सामाजिक स्वीकृति दी है। लोग यह भी कह रहे हैं कि अब तेजस्वी मुजफ्फरपुर कांड पर कैसे सवाल खड़े करेंगे। लोगों के सवाल सौ फीसदी सही हैं और राजद से इस बारे में पूछा ही जाना चाहिए। यहां तक कि उसे ट्रोल भी किया जाना उचित ही होगा। मगर हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि विभा बिहार की राजनीति की इकलौती ऐसी महिला नहीं हैं, जो इस तरह चुनावी मैदान में उतरी हैं। उनके सामने जो महिला मैदान में है, वह भी एक बाहुबली की ही पत्नी है।पति के बाहुबल और धनबल के सहारे ही गिरिराज सिंह जैसे कद्दावर नेता से टिकट छीना है और चुनाव लड़ा और जीता करती हैं।

महागठबंधन के ही टिकट पर सीवान से हिना शहाब के खड़े होने की पूरी संभावना है जो दु्र्दांत अपराधी शहाबुद्दीन की पत्नी हैं।वहीं एक अन्य बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी के मुंगेर से चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है। रंजीता और लवली भले ही आज चुनावी राजनीति में पक चुकी हैं, मगर उन्हें एंट्री अपने बाहुबलि पतियों पप्पू यादव और आनंद मोहन की वजह से ही मिली थी। वही हाल लेसी सिंह और बीमा भारती का भी है। खगड़िया के बाहुबली रणधीर यादव की तो दो-दो पत्नियां राजनीति में हैं। पूनम यादव और कृष्णा यादव। यह जानना रोचक होगा कि दोनों आपस में बहनें भी हैं।ये महिलाएं तो लोकसभा और विधानसभा के चुनावी अखाड़े में उतरती हैं, अगर पंचायती राज चुनाव पर गौर किया जाये तो वहां ऐसी महिलाओं की भरमार मिलेगी जो बाहुबलियों की पत्नियां हैं। जिला परिषद और प्रखंड प्रमुख के महिला आरक्षित पद पर तो खास तौर पर. मुखिया के पद का भी वही हाल है।

दरअसल विभा देवी बिहार की राजनीति में कोई नयी कैरेक्टर नहीं है, पिछले दो दशक में ऐसी महिलाओं की पूरी नस्ल राजनीति में उतरी है, जिनके पीछे उनके बाहुबली पति तन कर खड़े हैं। इस लिहाज से हम यह कह सकते हैं कि इन सफल महिलाओं के पीछे इनके पतियों का हाथ है। मजाक की बात छोड़ दें तो सही अर्थों में यह लोकतंत्र के साथ हुआ भद्दा मजाक है। संवैधानिक कारणों से चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा दिया गया अपराधी बैकडोर से अपनी पत्नियों को राजनीति में उतार रहा है और रिमोट से राज कर रहा है। बिहार में इस परंपरा के जनक खुद लालू यादव ही हैं, जेल जाते वक्त जिन्होंने अपनी पत्नी को कुर्सी थमा दी और उनके समर्थक फालतू तर्कों से इस फैसले को सही ठहराते रहे। किसी ने यह नहीं कहा कि पार्टी में क्या अनुभवी नेताओं की कमी थी। घर की सत्ता को घर में ही बचा लेने का यह कैसे सुविधावाद है। आज जो हुआ और जो हिना और नीलम देवी को टिकट मिलने के बाद होगा, उसके पीछे भी कहीं न कहीं राजद का लालूवाद है। हालांकि एनडीए के उम्मीदवार भी इस लालूवाद के असर में गहरे धंसे नजर आते हैं, चाहे वीणा सिहं हो या लेसी और बीमा।


पुष्यमित्र। पिछले डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। गांवों में बदलाव और उनसे जुड़े मुद्दों पर आपकी पैनी नज़र रहती है। जवाहर नवोदय विद्यालय से स्कूली शिक्षा। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता का अध्ययन। व्यावहारिक अनुभव कई पत्र-पत्रिकाओं के साथ जुड़ कर बटोरा। प्रभात खबर की संपादकीय टीम से इस्तीफा देकर इन दिनों बिहार में स्वतंत्र पत्रकारिता  करने में मशगुल ।