धीरेंद्र पुंडीर

आंख का अँधा मीडिया और नफरत में डूबे लोग देवबंद को झूठ लिख रहे हैं। देवबंद से दो बार को छोड़ कर ज़्यादातर हिदू राजपूत विधायक रहे हैं। पुंडीरों का रोम है देवबंद। मोदी की उत्तर प्रदेश की जीत अभिव्यक्ति के आयोजकों से पच नहीं रही है। जनता को पागल, बेवकूफ और सांप्रदायिक करार देने मे जुट गए लोगों मे बड़ी तादाद मीडिया के बौनों की है। ज़्यादातर स्टूडियो में बैठे ज्ञानीजन पत्रकार , एंकर मेकअप के नशे में बोझिल और सेक्युलर जाम पी रहे एडिटर्स विधवा विलाप में जुट कर पत्रकारिता का मूल मंत्र कि जनता सर्वोपरि होती है, को भी भूल गये।

मैं कई बार एडिटर्स को सुनता हूं, वो नफरत मे अँधे हो कर आंकड़ों को भी झुठलाने में लग जाते हैं। देवबंद की कहानी तो देश की आँख खोलने वाली है। अब मीडिया के लोग ये शोर मचा रहे है कि देवबंद मुस्लिम बाहुल्य सीट है। दुख बहुत होता है कि लोग अपनी नफरत में देश को दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे हैं। अब देवबंद की कहानी पूरी देखिये। इस सीट पर मुस्लिम आबादी 33 फ़ीसदी के करीब है। टोटल वोटर है 3 लाख 26 हजार के करीब। इसमें से मुस्लिम मतदाता हैं, 95000 से लेकर एक लाख पांच हज़ार के करीब। बाकि हिन्दू मतदाता हैं। इसमें 50000 दलित मतदाता भी शामिल हैं।

अब जरा आज़ादी से लेकर अब तक के विधायकों पर भी नज़र डाल लें। ठाकुर फूल सिंह, ठाकुर यशपाल सिंह, मोहम्मद उस्मान, ( ढाई साल के लिये), ठाकुर महावीर सिंह, ठाकुर महावीर रना, ठाकुर वीरेंद्र सिंह, शशिबाला पुंडीर, सुखबीर पुंडीर, राजेंद्र रना, मनोज चौधरी, राजेंद्र राणा, माविया अली (ढाई साल राजेंद्र राणा की असामयिक निधन ) और अब ठाकुर बृजेश सिंह।

(देवबंद को कुछ लोग पुंडीर राजपूतों का रोम कहते हैं।)


dhirendra pundhirधीरेंद्र पुंडीर। दिल से कवि, पेशे से पत्रकार। टीवी की पत्रकारिता के बीच अख़बारी पत्रकारिता का संयम और धीरज ही धीरेंद्र पुंढीर की अपनी विशिष्ट पहचान है।