सीमा मधुरिमा के फेसबुक वॉल से साभार

पिछली बार संस्कृतियों के परिवर्तन की बात करते समय आपको प्री वेडिंग शूट की यात्रा पर ले गए थे ! आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि आपको सांस्कृतिक परिवर्तन का ये दौर समझ में आ रहा होगा ! अब एक नए विषय को फिर लेते हैं और आपको प्री प्रेगनेंसी शूट की तरफ ले चलते हैं ! जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है ये मातृत्व से संबंधित है ! हालाँकि मेरी पोस्ट का कुछ तथाकथित नारीवादी संगठनों द्वारा विरोध किया जाना भी सम्भव है, पर मैं संवैधानिक अधिकार -अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा सम्मान करती हूँ और उसका मान रखते हुए और उसे साक्षी रखते हुए अपने विचार आपके समक्ष रखती हूँ !

पहले जब स्त्री प्रेग्नेंट होती थी यानी जब उसे अहसास होता था उसके भीतर कोई नया जीवन अंगड़ाई ले रहा है …तो उसके ख़ुशी की सीमा नहीं रहती थी और वह आने वाले बच्चे के सपनों में खो जाती थी। पर घर के लोगों से तब तक छुपाती थी जब तक छुपा पाती थी और बहुत ही शर्माते-शर्माते ये ख़ुशी जाहिर करती थी, जो उस समय के संस्कार भी थे ! साथ में शुरू हो जाती थी माँ के द्वारा उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को अच्छे संस्कार देने की कोशिश, जिसे वो अच्छी रचनायें पढ़कर खुद को शांत रखकर लड़ाई झगड़े से दूर रहकर देती थी ! हमारे यहाँ एक और प्रचलन था जब तक सफल डिलीवरी न हो जाय बच्चे के लिए घर के लोगों द्वारा नया सामान क्रय करने की पाबंदी थी। एक माह तक बच्चे को पुराने प्रयोग किये हुए कपड़े ही पहनने होते थे या फिर जो कपड़े बाहर का व्यक्ति खरीदकर दे दे वो !

अब देखते हैं आधुनिकता जो यहाँ भी घर कर गयी ! ये भी पश्चिमी समाज का अनुकरण ही है और साथ में आपके जेब पर खुलेआम डकैती डालने का एक तरीका ! आज जब स्त्री को पता चलता है वो माँ बनने वाली है, अगर वो उम्र में छोटी है तो घर में मचता है कोहराम और बड़ी मुश्किल से उसे ( बहू ) मनाया जाता है कि इससे उसे जल्दी ही एक जिम्मेदारी से मुक्ति मिल जायेगी, आराम से पल जाएगा बच्चा ! अगर वो पहले से तैयार है और प्लान के तहत मातृत्व धारण कर रही है तो इस समाचार के बाद शुरू हो जाते हैं उसके वो पूर्व प्लान जो उसे आधुनिक की श्रेणी में खड़ा करते हैं ! फिर बनाती है वो प्री प्रेगनेंसी शूट के वीडियोज/ फोटोज जिसके लिए ….करती हैं ढ़ेरों प्लानिं , करती हैं ढेरों शॉपिंग। जीरो साइज के कपड़ों जूतों चप्पलों के जोड़े और खरीदती हैं छोटे छोटे खिलौने।

फिर शुरू होता है फोटो शूट का दौर, जिसमें भावी मम्मी-पापा कभी इन कपड़ों को पकड़कर फोटो खिचवाते हैं। कभी इन छोटे जूते के जोड़ों को पकड़, कभी इन नन्हें नन्हें चप्पलों को पकड़ ! बम्प यानी प्रेगनेंसी के दौरान निकले हुए पेट की तस्वीरें तक खींचकर पोस्ट की जाती हैं। फॉलोवर्स को ये तस्वीरें इतनी खूबसूरत लगती हैं कि जैसे उन्होंने अपने अगल बगल कभी जिंदगी में प्रेग्नेंट वुमन देखी ही नहीं हो। उनके कमेंट तो और दिलचस्प होते हैं ….वाओ लुकिंग सेक्सी टाइप। चापलूसी की भी हद है ! कई बार आप खुद गौर करियेगा आजकल मॉल में शॉपिंग करने वाली प्रेग्नेंट वुमन जीन्स और टाइट टी शर्ट पहने अपनी बेबी बम्प को बाहर निकाले ऐसे इतराती दिख जाएंगी जैसे दुनिया की सबसे बड़ी बाजी वही जीतने वाली हैं !

 वास्तव में तथाकथित हाई सोसाइटी के लोगों के पास इन सब चोंचलों के इलावा कुछ होता नहीं , उनका खुद का ही रिश्ता कब तक चलेगा इसका कोई अनुमान नहीं होता, इसलिए वो हरपल के वीडियो और फोटोज के जरिये बाँध लेना चाहते हैं ! एक और मनोवैज्ञानिक कारण हो सकता है इसके पीछे, वो ये कि ऐसी स्थिति में होने वाले बच्चे के पिता को होने वाली माँ के साथ बांधकर रखा जाय और उसे भी हरपल आने वाली नई जिम्मेवारी का अहसास कराया जाय !

खैर कारण जो भी हो अभी ये नया ट्रेंड समाज में पसर रहा है। हो सकता है आने वाले दिनों में हर कोई अपना ले पर अभी फ़िलहाल तो ये सब परिवर्तन एक हास्यास्पद ही लगता है ! सोने पर सुहागा तो अब डिलीवरी का वीडियो तक बनने लगा है … कुछ भी सम्भव है , गनीमत है हमारे बच्चे पहले ही हो गए अन्यथा सबसे पहले तो वीडियोज को देखने की माँग बच्चे ही करते !


सीमा”मधुरिमा”। लखनऊ !