पटना साहिब की ‘दिलेर’ गाथा

पटना साहिब की ‘दिलेर’ गाथा

पुष्यमित्र

तख़्त हरमंदिर साहब के पीछे स्थित सेवादारों के क़्वार्टरों में इनदिनों बड़ी चहल पहल है। यह सरगर्मी उस खबर की वजह से है कि दलेर मेहंदी 350वें प्रकाशपर्व के दौरान अपना गायन प्रस्तुत करने पटना आने वाले हैं। ज्यादातर लोगों को शायद यह बात मालूम नहीं कि दलेर मेहंदी और उनके छोटे भाई मीका सिंह का जन्म पटना साहिब में हुआ है। उनके पिता हरमंदिर साहिब में रागी थे और उन्हें यहां क़्वार्टर मिला हुआ था। यहीं दोनों भाईयों का जन्म हुआ। दलेर को संगीत की शुरुआती शिक्षा भी यहीं मिली। बाद में उनका परिवार पंजाब चला गया। मगर दलेर अपने जन्मस्थान को भूलते नहीं। 2013 में बिहार दिवस के मौके पर कार्यक्रम पेश करने जब वे पटना पहुंचे तो इन क़्वार्टरों में भी आये थे। उनके क़्वार्टर में जो परिवार इन दिनों रह रहा है उसने यह तस्वीर ली है। सतनाम सिंह जो इस तस्वीर में बाईं तरफ नजर आ रहे हैं उनके बचपन के मित्र रहे हैं फिलहाल गुरुद्वारा गायघाट में हेड ग्रंथी हैं।

लंगरों की व्यवस्था देखकर मैं हमेशा से हैरत में पड़ जाता हूँ। चाहे सौ लोग पहुंचें या एक लाख वहां हर स्थितिबके हिसाब से इंतजाम रहता है। कई गुरुद्वारों में तो 24 घंटे लंगर चलता है। स्वर्ण मंदिर में चलने वाले लंगर पर फ़िल्में भी बनी हैं। इनमें से एक फ़िल्म मैंने हाल ही में फ़ूड चैनल पर देखी है। पटना साहिब में भी दो गुरुद्वारों में 24 घंटे लंगर का इंतजाम रहता है। हरमंदिर साहब में तो पिछवाड़े में स्थित मोदी खाने में आपको किसी भी आम दिन महिलाएं और बुजुर्ग आलू या मटर छीलते दिख जायेंगे। मगर मुझे बाल लीला मैनी संगत वाले गुरुद्वारे के लंगर की व्यवस्था बहुत आकर्षित करती है। यहां सारा इंतजाम हाईटेक किस्म का है। जैसे यहां रोटी पकाने वाली मशीन है जो एक घंटे में 3000 रोटियां पकाती हैं। तकरीबन सारा भोजन वाष्प वाले चूल्हे पर बनता है। न गैस की चिक-चिक न, लकड़ी का धुआं। एक पूरे कमरे को इन्होंने फ्रिज़ बना लिया है।

दो मंजिले किचेन में खाना लाने ले जाने के लिये लिफ्ट की व्यवस्था है। इसके बावजूद सिख समुदाय के लोग और कारसेवक हमेशा मदद करने के लिये जुटे रहते हैं। सब्जी काटने, खाना पकाने, परोसने और बरतन धोने तक के लिये। आम दिनों में पेड स्टाफ कम से कम होता है। सारा काम समाज के लोग खुद करते हैं। प्रकाशपर्व के दौरान मदद करने के लिये पूरे देश से 5000 से अधिक सिख संगतें यहां पहुंची हैं। लंगर के काम में 400-500 लोग लगे हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं हैं। ये लोग चार शिफ्ट में सेवा कर रहे हैं। इसके अलावा 300 खाना पकाने वालों को भी हायर किया गया है। यहां इन दिनों रोज डेढ़ टन आटा, 9 क्विंटल दूध, 2 क्विंटल दाल, 1200 किलो सब्जी, 5 क्विंटल तेल और 100 टीन घी की खपत है। सुबह- चाय/कॉफी, तीन तरह के पकौड़े, मिठाई, सुगर फ्री का भी आप्शन है। दोपहर और रात- तंदूरी रोटी, प्रसादा वाली रोटी, दाल, 2 सब्जियां, मीठा चावल, मिठाईयां। यहां से वापस लौटने वाले श्रद्धालुओं को पैक फ़ूड भी उपलब्ध कराया जा रहा है।                                      साभार- प्रभात ख़बर

PUSHYA PROFILE-1


पुष्यमित्र। पिछले डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। गांवों में बदलाव और उनसे जुड़े मुद्दों पर आपकी पैनी नज़र रहती है। जवाहर नवोदय विद्यालय से स्कूली शिक्षा। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता का अध्ययन। व्यावहारिक अनुभव कई पत्र-पत्रिकाओं के साथ जुड़ कर बटोरा। संप्रति- प्रभात खबर में वरिष्ठ संपादकीय सहयोगी। आप इनसे 09771927097 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

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