इंडियन एक्सप्रेस ने नोटबंदी डे से पहले किया बड़ा खुलासा ।

कर-स्वर्ग के स्वामियों को धरती के अज्ञानियों का एक पैग़ाम । कर के स्वर्गलोक का खुफिया तोरण द्वार सज़ा है। कोट पैंट पहने, खादी धारण किए नामचीन हस्तियों की जमात इस द्वार पर खड़ी है। टैक्स की जन्नत में इन महान विभूतियों को देख धरती के मामूली लोग हतप्रभ हैं। क्योंकि यहाँ मौजूद 714 लोगों की चुनिंदा भीड़ दलगत राजनीति से ऊपर है, यहाँ पार्टी निशान का झगड़ा नहीं, यहाँ सत्ता का सिरमौर बनने की होड़ नहीं, यहाँ एक दूसरे के ख़िलाफ़ कुतर्कों के तीर नहीं, यहाँ एक दूसरे के लिए गड्ढा खोदने का कॉम्पिटिशन नहीं, यहाँ अभाव, आकांक्षा, ईर्ष्या, द्वेष, राग-अनुराग, सब शून्य में समाहित है। जिसके पास सबसे ज़्यादा शून्य, वो सबसे अधिक परमगति को प्राप्त है। सब खाए-पीएँ-अघाये हैं, सब कुबेर के दरबार की क़ालीन पर विराजमान है। करों के स्वर्गलोक के ये सभी सिपाही धरती पर सदाचार के ब्रांड एंबेसडर हैं। इनके नाम भले ही अलग अलग हों, इनकी पहचान भले ही अलग अलग हो पर इस प्रतिभाशाली महापुरुष-मंडली की कुंडली एक है, लक्ष्यसिद्धि का मार्ग एक है, मंज़िल एक है, मुक़ाम एक है। सियासी शुचिता की आदर्शवाद स्थिति पर अगर कोई ग्रंथ लिखा जाए तो यही जननायकों उसकी भूमिका और प्रस्तावना लिखेंगे। इसलिए हे “कर स्वर्गलोक” के द्वारपालों..आपको शत शत नमन।
धरती के इन अज्ञानियों को माफ कर देना। भूलनश ये आपको जाने किन किन विशेषणों से सम्मानित करें, जानें किन किन उपाधियाँ से विभूषित करें.. लेकिन आप विचलित न हों प्रभु। इन्हें नहीं पता आपकी अद्भुत विलक्षण प्रतिभा के बारे में। टैक्स हेराफेरी में आप लोगों ने जो सिद्धि हासिल की है, वो बरसों की तपस्या और साधना से प्राप्त होती है, हम धरतीवासी मूढ़ हैं, ख़ून पसीने की कमाई वाले टैक्स से सरकार का ख़ज़ाना भरते रहते हैं, अपना ख़ाली करते रहते हैं और चौड़े होकर, भरे समाज में छाती फुला कर भारी भरकम करदाता होने का गुमान पालते हैं। ये मानव स्वभाव है मालिक, इन्हें माफ कर दो, इनमें अब भी सतयुग का अंश समाहित है , इनके सपनों में अब भी हरिश्चंद्र की आत्मा नाचती है। धीरे धीरे सीख जाएँगे वक़्त के साथ चलना। लेकिन आप तो कलयुग के कर्णधार हैं, दोनों लोकों के स्वामी हैं, वो कुबेर हैं जिसका एक पाँव कर-जन्नत में तो दूसरा पाँव ‘टैक्स पापियों’ का बोझ उठाए धरती पर है।
ये मूरख आपकी अविश्वसनीय ताक़त से वाक़िफ़ नहीं हैं। असंख्य अशर्फ़ियां अर्जित करने की आपकी असीमित क्षमताओं से अनजान हैं। इसलिए आप इनके दाँत निपोरने, बौराने या चाय वाले चौक पर चिचियाने से बिल्कुल मत टेंशनाइए। आप निरंतर, निर्विकार और निष्काम भाव से शून्य की तरफ़ बढ़ते रहिए, अपने कर-स्वर्ग के खाते में शून्य को बढ़ाते रहिए और यक़ीन मानिए इस प्रचंड प्रताप का प्रकाश, येन केन प्रकारेण प्राप्त करने की ये प्रतिभा, कर-स्वर्ग की सीढी पर पाँव रखने की ये प्रसिद्धि ही कालेधन की दुनिया में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। हम उस दिन का इंतज़ार करेंगे जब आप लोगों के अथक प्रयासों की बदौलत धन की दुनिया से रंगभेद हमेशा हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा।जब धन न काला होगा, न सफ़ेद होगा, धन सिर्फ धन होगा, धन को किसी भी तरीक़े से अर्जित वाला जन-जन प्रशस्ति का हक़दार होगा। इंतज़ार है उस स्वर्ण काल!!!!sant prasad profile


संत प्रसाद। बक्सर के निवासी संत प्रसाद ने इन दिनों गाजियाबाद में डेरा डाल रखा है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र। जी न्यूज, न्यूज 24, इंडिया टीवी समेत कई चैनलों में अनुभव बटोरा। 

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