‘ पद्मावती फिल्म में अलाउद्‌दीन एक धूर्त्त, अहंकारी, कपटी, दुश्चरित्र और रक्तपिपासु इंसान की तरह चित्रित है। वह अपने चाचा सम्राट जलालुद्‌दीन की हत्या करता है, अपनी चचेरी बहन से जबर्दस्ती शादी करता है, वह समलैंगिक है, वह उस राघव चेतन की भी हत्या कर देता है, जो उसे पद्‌मावती के अलौकिक सौंदर्य की कथा कहकर चित्तौड़ पर हमले के लिए प्रेरित करता है।अलाउद्‌दीन ने धोखे से महाराज रतन सिंह को दिल्ली बुलाकर गिरफ्तार कर लिया लेकिन बहादुर पद्‌मावती खुद दिल्ली जाकर अलाउद्‌दीन को चकमा देकर रतन सिंह को छुड़ा लाती हैं। अलाउद्‌दीन और रतनसिंह की मुठभेड़ों में मजहब कहीं नहीं आता। वह मामला शुद्ध देशी और विदेशी का दिखाई पड़ता है। ‘ ये टिप्पणी है लेखक-पत्रकार वेदप्रताप वैदिक की , जिन्होंने भंसाली की फिल्म पद्मावती देख ली है ।

पद्मावती के खिलाफ करणी सेना की धमकियों और उत्पात के बीच कुछ पत्रकारों , संपादकों और लेखकों को फिल्म दिखाई गई है . इनमें इंडिया टीवी के रजत शर्मा भी हैं और रिपब्लिक टीवी के अर्णब गोस्वामी भी . इन सबकी मानें तो फिल्म में राजपूती शान का बखान है और खिलजी के कपटी इरादों के खिलाफ पद्मावती और राजपुताने का ऐसी वीरगाथा कि देश का सीना चौड़ा हो जाएगा। वैदिक ने दैनिक भास्कर में लिखा है कि ‘ जहां तक पद्‌मावती का प्रश्न है, श्रीलंका की राजकुमारी और परम सुंदरी युवती को रतन सिंह एक शिकार के दौरान देखते हैं और उसके प्रेम-पाश में बंध जाते हैं।

फिल्म के शुरू से अंत तक पद्‌मावती की वेशभूषा और अलंकरण अद्वितीय हैं। वे चित्तौड़ की इस महारानी के सौंदर्य में चार चांद लगा देते हैं। रतनसिंह और पद्‌मावती के प्रेम-प्रसंग को चोरी-चोरी देखने वाले राघव चेतन को देश-निकाला दिया जाता है। पद्‌मावती उसे सजा-ए-मौत देने की बजाय देश-निकाला सुझाती हैं। ऐसी उदार पद्‌मावती का वह दुर्गा रूप भी देखने को मिलता है, जब उन्हें अलाउद्‌दीन खिलजी की इच्छा बताई जाती है। पूरी फिल्म में कहीं भी ऐसी बात नहीं है, जिससे दूर-दूर तक यह अंदेशा हो कि पद्‌मावती का अलाउद्‌दीन के प्रति जरा-सा भी आकर्षण रहा हो। बल्कि पद्‌मावती और रतनसिंह के संवाद सुनकर सीना फूल उठता है कि वाह! क्या बात है? एक विदेशी हमलावर से भिड़कर जान न्योछावर करने वाले ये राजपूत भारत की शान हैं। इस फिल्म में पद्‌मावती साहस और चातुर्य की मिसाल भी हैं। वे कैसे अपने 800 सैनिकों को अपनी दासी का रूप देकर दिल्ली ले गईं और किस तरकीब से पति को जेल से छुड़ाया, यह दृश्य भी बहुत मार्मिक और प्रभावशाली है। दूसरे युद्ध में वीर रतन सिंह कैसे धोखे से मारे गए, कैसे उन्होंने अलाउद्‌दीन के छक्के छुड़ाए और कैसे पद्‌मावती ने हजारों राजपूत महिलाओं के साथ जौहर किया, यह भी बहुत रोमांचक समापन है। जहां तक घूमर नृत्य का सवाल है, उसके बारे में भी तरह-तरह की आपत्तियां की गई थीं। लेकिन, वह नृत्य किसी महल का बिल्कुल अंदरूनी मामला है। वह किसी शहंशाह की खुशामद में नहीं किया गया है। उस नृत्य के समय महाराज रतन सिंह के अलावा कोई भी पुरुष वहां हाजिर नहीं था। वह नृत्य बहुत संयत और मर्यादित है। उसमें कहीं भी उद्‌दंडता या अश्लीलता का लेश-मात्र भी नहीं है

भंसाली की फिल्म ‘ पद्मावती ‘ में जायसी की पद्मावती की वीरगाथा और गौरवशाली कहानी को और ऊंचाई दी गई है . ये भी फिल्म देखने वालों का मानना है . तो इसका मतलब ये हुआ कि इतने दिनों से फिल्म की रिलीज के खिलाफ बवाल मचा रहे करणी सैनिक की धमकियां अब फिल्म को सुपरहिट कराने में मददगार साबित होगी . बवाल , हंगामें और सड़कछाप धमकियों से इस फिल्म को जितना प्रचार मिल गया है , उतना तो शायद सौ करोड़ खर्च करके भी नहीं मिल पाता ।


10570352_972098456134317_864997504139333871_nअजीत अंजुम। बिहार के बेगुसराय जिले के निवासी। पत्रकारिता जगत में अपने अल्हड़, फक्कड़ मिजाजी के साथ बड़े मीडिया हाउसेज के महारथी। बीएजी फिल्म के साथ लंबा नाता। स्टार न्यूज़ के लिए सनसनी और पोलखोल जैसे कार्यक्रमों के सूत्रधार। आज तक में छोटी सी पारी के बाद न्यूज़ 24 लॉन्च करने का श्रेय। इंडिया टीवी के पूर्व मैनेजिंग एडिटर।

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