ये तस्वीरें वैसे तो सहज योग दिवस सी की तस्वीरों सी हैं लेकिन जब इनका परिचय आप पाएंगे तो मन में बहुत कुछ उतर आएगा।

जालौन जिला जेल में योग करते कैदी ।

ये जिला कारागार जालौन के चित्र हैं। प्रायः जेल कुख्यात शब्द से परिभाषित होती है, यहाँ से निकलने वाली खबरें भी असामान्य हुआ करती हैं, कभी लूट, कभी मारपीट, कभी मौत या फिर कभी बलवा एवं भ्रस्टाचार, जेल का नाम लेने भर से मानसिक पटल ऐसी कल्पनाएँ चित्रित करने लगता है किन्तु योग दिवस के उपलक्ष्य में यहाँ योग की कार्यशाला चलाई गयी, अधिकारीयों ने कैदियों के साथ मिलकर योग करने का ना केवल आवाहन किया अपितु योग के लिए बंदियों को उत्साहित भी किया। इस सात दिवसीय कार्यशाला में जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा, जेलर बीरेंद्र त्रिवेदी, एवं अन्य जिला कारागार उरई के अधिकारियों ने प्रतिदिन बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

महिला कैदियों ने भी किया योग ।

जेलर बीरेंद्र त्रिवेदी ने बताया योग शाश्वत है, ये हम साथ चलें साथ बोलें की उत्कृष्ट वैदिक भावना है । इस प्राचीन गौरव को आत्मसात करके ही हम समाज को एक पवित्र दिशा की अग्रसर कर सकते हैं । उन्होंने ने कहा योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं मानसिक शुचिता के लिए भी आवश्यक है, ये वो विचार है जो .सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामया।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भागभवेत।। के उदघोष के साथ चलता है, जेल विभाग उरई बंदियों के साथ योग करके यही सन्देश प्रेषित कर रहा है कि मानवता और शुचिता ही सार्थक जीवन का उद्देश्य है ।

21 जून 2017, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तस्वीर । फोटो- कीर्ति दीक्षित