18 जुलाई को दिल्ली में स्कूल शिक्षा नीति के विरोध में प्रदर्शन

18 जुलाई को दिल्ली में स्कूल शिक्षा नीति के विरोध में प्रदर्शन

प्रेस विज्ञप्ति

नागरिक बंधुगण, यह बहुत ही क्षोभ की बात है कि देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले आम परिवारों के करोड़ों बच्चों के भविष्य को बर्बाद करने के लिए पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक बेरोकटोक पास करने की नीति हरियाणा समेत पूरे देश में पिछले कई सालों से लागू है। बेरोकटोक पास करने और साल-दर-साल बच्चों को अगली कक्षा में बढ़ाते जाने से, भले ही वह कुछ सीख पाया हो या नहीं, बच्चों की शिक्षा चौपट हो गई है। इस नीति ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और गंभीरता खत्म कर दी है और साथ ही साथ बच्चों को पढ़ाने में अध्यापकों की अहम भूमिका पर भी कुठाराघात किया है। हालात ये है कि एक सर्वे के मुताबिक 53.2  प्रतिशत छात्र दूसरी कक्षा की पुस्तकें नहीं पढ़ सकते, 46.6 प्रतिशत छात्र दो अंकों के सामान्य जोड़ घटा नहीं कर सकते, 75% से भी ज्यादा छात्र गुणा भाग नहीं कर सकते।  सरकार खुद स्वीकार करती है कि पहली कक्षा के 10 में से 4 छात्र आठवीं कक्षा तक पढ़ाई छोड़ देते हैं। बाकी आधे नवमीं दसवीं कक्षा भी पास नहीं कर पाते, उच्च शिक्षा की बात तो दूर रही।  जाहिर है ये सब सरकारी स्कूलों में पढने वाले आम गरीब परिवारों के बच्चे हैं। इस तरह केंद्र व राज्य सरकारें बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही हैं।
ध्यान रहे, इस विनाशकारी नीति को सभी संसदीय पार्टियां अपने शासन वाले राज्यों में लागू कर रही हैं।  2009 में शिक्षा का अधिकार कानून लागू करके यूपीए सरकार ने कक्षा आठ तक पास-फेल प्रणाली को समाप्त किया था। एनडीए सरकार भी इसी नीति को जी-जान से लागू कर रही है। एस यू सी आई (कम्युनिस्ट) बेरोकटोक पास की इस नीति का शुरूआत से ही कड़ा विरोध कर रही है। पार्टी ने 2012 में अन्य मांगों के साथ इस मांग पर भी लगभग दो करोड़ हस्ताक्षर तत्कालीन सरकार को दिए थे। आंदोलन का यह सिलसिला लगातार जारी है और तब तक जारी रहेगा जब तक कि बेरोकटोक पास करने की यह नीति पूरी तरह से खत्म नहीं कर दी जाती है।
उल्लेखनीय है कि उभरते जन विरोधी आंदोलन के दबाव में केंद्र सरकार इस पर विचार करने को बाध्य हुई है । अब मीडिया खबरों में है कि सरकार कक्षा पांचवी व कक्षा आठवीं में पास फेल प्रणाली में बदलाव ला रही है जबकि अन्य कक्षाओं में बेरोकटोक पास करना जारी रहेगा । सरकार की यह सोच पूरी तरह से तर्कहीन, शिक्षा विरोधी व छात्र विरोधी है। यह नीति एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है। इस पूंजीवादी व्यवस्था की सेवादार पार्टियों की सरकारें चाहती हैं कि कम से कम बच्चे पढें वरना पढ़कर यह रोजगार की मांग करेंगे और इस मुनाफाखोर व्यवस्था को चुनौती देंगे। इसलिए उनसे शिक्षा छीनी जा रही है। शिक्षा का निजीकरण, व्यापारीकरण करना, सिलेबस को गैर-वैज्ञानिक व सांप्रदायिक बनाना भी इसी साजिश का हिस्सा है। अतः बेरोकटोक पास करने की नीति का विरोध करना जरुरी है। यह शिक्षा प्रणाली दो तरह के नागरिक तैयार कर रही है। सरकारी स्कूलों में जाने वाले जनसाधारण परिवारों, गरीबों के बच्चों को शिक्षा से वंचित कर दास बनाना और अमीरों के बच्चों को उच्च से उच्च शिक्षा प्राप्त कर बड़े पदों पर बिठा शासक बनाना। हमें यह कतई मन्जूर नहीं है।
 अतः एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) सही सोच रखने वाले सभी लोगों से अपील करती है कि पहली कक्षा से ही पास-फेल प्रणाली पुन: लागू कराने की मांग पर 18 जुलाई 2018 को संसद पर प्रदर्शन में शामिल हो। उस दिन संसद का मानसून सत्र शुरू होगा।

स्रोत- एसयूसीआई (कम्युनिस्ट), सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट),  हरियाणा राज्य कमेटी 934 बी/ 28, भरत कॉलोनी, रोहतक। फ़ोन -01262-280113

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