शहीद रतन ठाकुर।

आतंकी हमले में शहीद सीआरपीएफ जवान रतन कुमार ठाकुर का दिन में पत्नी के पास फ़ोन आया था कि श्रीनगर जा रहा हूं। वहां पहुंचकर शाम को फोन करूंगा। लेकिन उनका फोन नहीं आया। पत्नी ने फोन किया तो स्वीच ऑफ मिला। और फिर बाद में खबर आई तो उनके शहीद होने की. शहीद रतन कुमार बिहार भागलपुर के रहने वाले थे, घर पर उनकी पत्नी राजनंदिनी देवी और चार साल का बेटा कृष्णा है। राजनंदिनी फिर मां बनने वाली है.

यह एक शहीद जवान की कहानी है, ऐसे ही 44 शहीद और उनके परिवार की कहानी होगी, जब देश का जवान सेना मे जाता है तो उसे पता ओता है उसकी जान कभी भी जा सकती है. उनके परिवार वालों के दिलभी बहुत मजबूत होते हैं.

लेकिन बिना युद्ध के इतने जवान शहीद हो जा रहे हैं, इनके जान की कीमत इतनी सस्ती नहीं है. एक सर के बदले 10 सर और 56 इंच का सीना दिखाने वाले सिर्फ बातें करने से काम नहीं चलेगा. इसका जवाब तो सरकार को देना ही होगा…खूफिया एजेंसी ने 8 फरवरी को बाकायदा IED हमले का अलर्ट जारी किया था. इसमें साफ तौर पर हिदायत दी गई थी कि बगैर इलाकों को sanitize किये सुरक्षा काफिले आगे न बढ़े. लेकिन इस चेतावनी को भी नजरअंदाज किया गया.


रजिया अंसारी, पत्रकार।