लो आ गई आदिवासियों की फटफटिया एंबुलेंस

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में इन दिनों फटफटिया यानी बाइक एंबुलेस मरीजों के लिए किसी एयर एंबुलेंस से कम नहीं । प्रेग्नेंट महिला को अस्पताल ले जाना हो या फिर किसी जरूरतमंद को इलाज करने जिला हॉस्पिटल, ये फटफटिया एंबुलेंस फौरन हाजिर हो जाती है । मुश्किल रास्तों पर ये एंबुलेंस सरपट दौड़ती है । पिछले करीब एक साल में बाइक एंबुलेंस से करीब 300 लोगों की मदद पहुंचाई गई है,  जिसमें ज्यादातर गर्भवती महिलाएं शामिल हैं यानी एक साथ दो-दो जिंदगियां सुरक्षित की हैं । इस एंबुलेंस को कुछ उसी तरह डिजाइन किया गया है जैसे शोले फिल्म में जय और वीरू की बाइक में साइड में एक सपोर्टर लगा था जो आगे चलकर दिव्यांगों के लिए काफी मददगार साबित हुई ।फोटो- IANS

यूनिसेफ की मदद से इस बाइक को तैयार करने में साथी समाज सेवा संस्था और राज्य स्वास्थ विभाग ने तैयार कराई है । इसके निर्माण में करीब एक लाख 70 हजार का खर्च आया है और इसे चलाने में हर महीने करीब 15 हजार खर्च पड़ रहा है जो काफी किफायदी भी है और उन इलाकों के लिए काफी बेहतर जहां आसानी से कार या एंबुलेंस नहीं पहुंच सकती। छत्तीसगढ़ में फिलहाल एक ही बाइक एंबुलेंस जंगल में उतारी गई है हालांकि जल्द ही 10 और बाइक एंबुलेंस लाने की योजना है । NIT रायपुर के छात्र इसके डिजाइन को और बेहतर बनाने का काम कर रहे हैं । ऐसे में आने वाले दिनों में ये बाइक आदिवासियों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी इसमें कोई संदेह नहीं ।

ssssबाइक एंबुलेंस भारत के लिए अनोखा प्रयोग हैं । हालांकि अफ्रीकी देशों में पहले से ही ये काफी लोकप्रिय है । पथरीले और जंगली रास्तों पर आदिवासियों के लिए ये काफी कारगर साबित हुआ है ।

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