किसानों के कर्ज में मनमानी बंद करें बैंक- सुप्रीम कोर्ट

scमाल्या को लोन देना हो तो बैंक अपना खजाना खोल देतें हैं और जब किसानों की बारी आती है तो रुला देते हैं । यही नहीं कर्ज वसूली में भी यही हाल होता है । सरकार डिफॉल्टरों को भागने देती है और किसानों के खिलाफ़ विज्ञापन देकर उन्हें डिफॉल्टर बताने मे कोई कोर-कसर नहीं छोड़ती । सोमवार को स्वराज अभियान की ओर से बैंकों की मनमानी से जुड़ी एक याचिका पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट को यहां तक कहना पड़ा कि सर्वोच्च अदालत में ऐसी याचिकाओं की सुनवाई का क्या फायदा जब सरकार और बैंकों को हमारे निर्देशों को लागू ही नहीं करना है । स्वराज अभियान की याचिक पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये हकीकत है कि आज किसानों को कर्ज नहीं मिल रहा, बैंक अपनी मनमानी कर रहे हैं, सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए । सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी यूं ही नहीं है । आप गांवों में चले जाएइ क्या मजाल कि बैंक आपको लोन दे दे । आपको रोजगार के लिए लोन लेना है तो पहले कमीशन की बात कीजिए फिर लोन की बात, अगर आप कमीशन देने पर राजी हो गए तो आपकी फाइल आगे बढ़ेगी नहीं तो इतने नियम बता दिए जाएंगे कि उसी में उलझ कर रह जाएंगे ।। ऐसा भी नहीं है कि सरकार को नहीं पता है या फिर आरबीआई को नहीं मालूम बल्कि सच तो ये है कि कई बार संसद में भी इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद भी आज तक कुछ नहीं हुआ । सरकार हमें आपको रोजगार दिलाने के लिए, व्यवसाय लगाने लिए खूब योजनाएं बनाती है लेकिन बैंक लोन देगा ही नहीं तो आप कारोबार शुरू कहां से करेंगे । ऐसे में सर्वोच्च अदालत की ये टिप्पणी सरकार और बैंकों के लिए एक हिदायत है लेकिन किसानों के लिए किसी उम्मीद से कम नहीं ।

One thought on “किसानों के कर्ज में मनमानी बंद करें बैंक- सुप्रीम कोर्ट

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