फोटो- वरिष्ठ पत्रकार अजय लाल की फेसबुक वॉल से

इन दिनों झारखंड के जंगलों में पलाश के फूल देखते ही बन रहे हैं । आदिवासी संस्कृति में इन फूलों का काफी महत्व है । इस वक्त जो भी इन फूलों को देखता है या इन रास्तों से होकर गुजरता है वो यहां ठहर जाना चाहता है । क्योंकि इन्हें देखकर ऐसा लगता है कि धरती पर इससे खूबसूरत चीज और कुछ नहीं हो सकती । बसंत शुरू होते ही ये फूल दिखाई देने लगते हैं । आदिवासी लड़कियां इन फूलों को अपने जुड़ों में लगाकर सजती संवरती हैं । सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इस फूल का विशेष महत्व है। परंपरा है कि जब तक पलाश के फूल से जाहिर थान में पूजा ना हो जाए महिलाएं इसे अपने जुड़े में नहीं लगाती । पलाश का पेड़ मध्यम आकार का, करीब १२ से १५ मीटर लंबा, होता है। इसका तना सीधा, अनियमित शाखाओं और खुरदुरे तने वाला होता है। इसके पल्लव धूसर या भूरे रंग के रेशमी और रोयेंदार होते हैं।