जौनपुर प्रतिनिधि

हमारी सरकारें गांवों के विकास के नाम पर अरबों रुपये हर साल खर्च करती हैं, लेकिन क्या आजादी के 7 दशक बाद भी हमारे गांवों की सूरत बदली । हमारी सरकारें सड़कों को विकास का जरिया मानती हैं फिर भी गांवों तक सड़कों की हालत किसी से छिपी नहीं है । किसी तरह सड़क निर्माण का काम शुरू भी हुआ तो पूरा नहीं हुआ, अगर पूरा हो भी गया तो कुछ महीने बाद चलने लायक नहीं रहा जाती । खैर हम यहां किसी गलतियां नहीं गिना रहे बस गांवों की व्यथा बता रहे हैं। जरा सोचिए अगर शहरों में सड़क या फिर किसी पुल के निर्माण में देरी होती है तो वो राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है, लेकिन गांवों में बरसों से निर्माणाधीन पुल या फिर सड़क के लिए कोई आवाज नहीं उठती । शायद इसके लिए गांव के लोगों का धैर्यवान होना ही जिम्मेदार है, लेकिन सरकारों की ढिलाई और प्रशासन की लेट-लतीफी से गांव का धैर्य भी टूटने लगा है और युवा पीढ़ी अब अपने हक के लिए आवाज उठने लगी है।

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की जहां निर्माणाधीन पुल के निर्माण के लिए युवाओं ने रविवार को सत्याग्रह की शुरुआत की ।दरअसल मुफ्तीगंज और जलालपुर ब्लॉक को जोड़ने वाले बीरमपुर भड़ेहरी घाट पर बड़ी संख्या में युवाओं ने बैनर पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया ।समाजसेवी और पेशे से वकील विकास तिवारी, विपिन सिंह और बेलांव निवासी संतोष यादव की अगुवाई में बड़ी संख्या में युवा इस सत्याग्रह में शामिल हुए और पिछले 6 साल से निर्माणाधीन पुल को बनाने की मांग की ।

भड़हरी घाट पर साल 2010-11 में तत्कालीन विधायक जगदीश नारायण राय ने पुल निर्माण की नींव रखी और पुल का काम भी शुरू हो गया, लेकिन 6 बरस बीत जाने के बाद भी आधे-अंधूरे पीलर्स के अलावा और कुछ नजर नहीं आ रहा । जिस वक्त पुल की नींव रखी गई प्रदेश में मायावती सरकार थी और बाद में समाजवादी पार्टी की 5 साल तक सरकार रही और अब बीजेपी सरकार के 6 महीने बीत जाने के बाद भी पुल निर्माण की सुध किसी ने नहीं ली । लिहाजा गांव के युवाओं ने अपनी आवाज उठाने के लिए रविवार को हाथ में तख्ती लेकर गांव-गांव घूमे और आखिर में निर्माणाधीन पुल के पास एक दिन का सत्याग्रह किया।

पुल निर्माण के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री और परियोजना अधिकारी को पत्र भी लिखा गया लेकिन काम में कोई खास प्रगति नहीं हुई । गोमती नदी पर बनने वाले इस पुल की लंबाई 237 मीटर है और इसके लिए करीब 785 लाख रुपये खर्च का अनुमान भी था, लेकिन ना तो पैसे का पता चला और ना ही पुल बना । लिहाजा गांववालों ने प्रशासन को दो महीने की मोहलत दी है और कहा है कि इस दौरान काम शुरू नहीं हुआ तो जिल मुख्यालय पर गांव वाले आमरण अनशन पर बैठेंगे ।


विजय  प्रकाश/  मूल रूप से जौनपुर जिले के मुफ्तीगंज के निवासी । बीए, बीएड की पढ़ाई के बाद इन दिनों सामाजिक कार्यों में जुटे हैं।