ये तस्वीरें लखनऊ के बंथरा बाजार में “थारू” बस्ती की हैं। जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चहिए उनके हाथों में तास के पत्ते, जुआ और मुंह में टाफी की जगह गुटखा तम्बाखू भरा हुआ देखकर मन बहुत विचलित हुआ। बस्ती में घूमकर देखा तो पच्चास बच्चे इस दलदल में फसें हुए हैं। बच्चों को स्कूल की तरफ ले जाने के लिए प्रयास शुरू किया और इस सम्बन्ध में बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए सरकार को पत्र लिखा लेकिन अफसोस की सरकार की तरफ से कोई उपाय नही किया गया।
बच्चों का भविष्य अंधकार में डूबता देख मैं बहुत दुखी हुआ और हमनें कुछ दिनों की कड़ी मेहनत और कोशिशों से 10 बच्चों को उस अपराध के दलदल से निकालने में कामयाब रहें। बस्ती के उन बच्चों को शिक्षा की ओर ले जाने की हमारी कोशिशों को कामयाब करने में साथी विनीता ने मदद करते हुए उन बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें शाम को पढ़ाना शुरू किया। आज बच्चे पढ़ाई के जरिए अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहें है और हम लोग उस बस्ती के बाकी बचे बच्चों को शिक्षा की धारा में लाने के लिए सघर्ष कर रहें है।


ashish profile-2बाँदा से आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर की रिपोर्ट फेसबुक पर एकला चलो रे‘ के नारे के साथ आशीष अपने तरह की यायावरी रिपोर्टिंग कर रहे हैं। चित्रकूट ग्रामोदय यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। आप आशीष से ashishdixit01@gmail.com पर संवाद कर सकते हैं।