बीएचयू के कुलपति की ‘बत्ती गुल’

बीएचयू के कुलपति की ‘बत्ती गुल’

विकास तिवारी

राजनेता से लेकर कुलपति तक और अफसरों से लेकर सांसद तक सभी लालबत्ती को अपनी शान समझते रहे । गाड़ी के ऊपर लगी बत्ती जितनी लाल, रुतबा उतना ही बड़ा। सुप्रीम कोर्ट के बार-बार आदेशों के बाद भी अवैध तरीके से तमाम पदाधिकारी लालबत्ती का इस्तेमाल करते रहे। बीएचयू के छात्रों का कहना है कि कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी भी लालबत्ती को शान समझने वालों की फेहरिस्त में शुमार रहे। इसकी शिकायत जिलाधिकारी वाराणसी से बार-बार की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। समाजसेवी अवधेश दीक्षित और एडवोकेट विकास तिवारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मई 2016 में जिलाधिकारी से शिकायत की। महीनों बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली और ना ही कुलपति महोदय को अपनी शान की लालबत्ती उतारने में कोई दिलचस्पी दिखी। कुलपति की लालबत्ती की शिकायत यूपी सरकार और केंद्र सरकार तक भेजी गई।

पीएमओ और पीएम नरेंद्र मोदी को ट्वीट भी किया गया । जिसमें कुलपति महोदय की लालबत्ती को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। आखिरकार 19 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला किया। अब तो केंद्रीय मंत्रियों और राज्य सरकार के मंत्रियों को ही लाल बत्ती से तौबा करने की नौबत आ गई। बीएचयू के कुलपति की लालबत्ती भी उतरनी ही थी।  नेताओं, मंत्रियों और अफसरों की गाड़ी से भी बत्ती गुल होने के सिलसिला शुरू हो गया।

देश में वीआईपी कल्चर खत्म होना जरूरी है और लालबत्ती उतरना उसी दिशा में पहला कदम है। प्रधानमंत्री का ये फैसला समाजिक बदलाव की लड़ाई लड़ने वाले युवाओं और बुद्धिजीवियों की जीत है।


विकास तिवारी/ यूपी के जौनपुर  जिले के निवासी। समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहते हैं। समाजिक बदलाव के लिए हर पल चुनौतियों के लिए तैयार रहते हैं ।

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